गेहूं निर्यात नीति में बड़ा बदलाव, लेकिन कीमत प्रतिस्पर्धा बनी चुनौती: राजेश जैन पहाड़िया
24-Aug-2026 06:36 PM
भारत ने गेहूं, गेहूं के आटे और संबंधित उत्पादों के निर्यात को ‘Prohibited’ से ‘Free’ श्रेणी में कर दिया है। इससे निर्यातकों को विदेशों में गेहूं और गेहूं उत्पादों की बिक्री के लिए अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
हालांकि, नीति में बदलाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की प्रतिस्पर्धात्मकता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मौजूदा घरेलू थोक कीमत 27,750 रुपये प्रति टन है। 95.60 रुपये प्रति डॉलर की विनिमय दर पर यह करीब 290 डॉलर प्रति टन बैठती है। परिवहन, पोर्ट हैंडलिंग और अन्य निर्यात लागत जोड़ने के बाद भारतीय गेहूं का अनुमानित FOB मूल्य 325-340 डॉलर प्रति टन हो सकता है।
इसके मुकाबले रूस का गेहूं करीब 216-217 डॉलर, अर्जेंटीना का 257 डॉलर और ऑस्ट्रेलिया APW का करीब 291 डॉलर प्रति टन है। ऐसे में बड़े अंतरराष्ट्रीय टेंडरों में भारत के लिए रूस जैसे कम लागत वाले निर्यातकों से मुकाबला करना मुश्किल है।
भारत के लिए बांग्लादेश, नेपाल, भूटान बाजार अधिक व्यावहारिक हो सकते हैं। इन बाजारों में कम दूरी और मालभाड़े का लाभ भारतीय गेहूं की ऊंची कीमत की कुछ भरपाई कर सकता है।
विश्लेषण के अनुसार, करीब 15-30 डॉलर प्रति टन की मालभाड़ा बचत भारतीय गेहूं को क्षेत्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद कर सकती है।गेहूं आटा, मैदा और संबंधित उत्पादों का निर्यात भी अब मुक्त कर दिया गया है। लेकिन मिलिंग, पैकेजिंग, हैंडलिंग और कंटेनर मालभाड़े के कारण लागत बढ़ जाती है। भारतीय आटे की अनुमानित निर्यात लागत 380-420 डॉलर प्रति टन C&F बताई गई है। इसलिए बड़े पैमाने पर निर्यात के बजाय GCC और दक्षिण-पूर्व एशिया के चुनिंदा बाजार अधिक संभावित हो सकते हैं।
निर्यात प्रतिबंध हटने से भारत को गेहूं व्यापार में नई संभावनाएं मिली हैं, लेकिन तत्काल बड़े पैमाने पर निर्यात बढ़ना मुश्किल है। भारत की वास्तविक प्रतिस्पर्धा घरेलू गेहूं कीमत, अंतरराष्ट्रीय भाव और मालभाड़े पर निर्भर करेगी।
इसलिए आने वाले समय में भारत के लिए वैश्विक टेंडरों के बजाय नजदीकी क्षेत्रीय बाजारों में निर्यात बढ़ाने की संभावना अधिक दिखाई देती है।
