आयात शुल्क हटने के बाद महाराष्ट्र में चीनी कीमतें गिरीं
24-Aug-2026 07:27 PM
सरकार द्वारा चीनी आयात शुल्क हटाने और थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय करने के बाद प्रमुख बाजारों में चीनी के एक्स-मिल भाव और रीसेल भाव रिकॉर्ड स्तर से नीचे आ गए हैं।
सरकार ने गुरुवार को कच्ची चीनी पर 100% आयात शुल्क हटाने और अक्टूबर के अंत तक 10 लाख टन कच्ची चीनी को शून्य शुल्क पर आयात करने की अनुमति देने का फैसला किया था। सरकार ने घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और त्योहारी सीजन से पहले रिकॉर्ड ऊंची चीनी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया है।
इसके अलावा, कीमतों पर नियंत्रण के लिए थोक चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा भी लागू की गई है। जिन उपभोक्ताओं की मासिक खपत 10 टन से अधिक है, वे 1 सितंबर से 30 नवंबर तक 15 दिनों से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
यह नियम कन्फेक्शनरी कंपनियों, सॉफ्ट-ड्रिंक निर्माताओं, फूड-प्रोसेसिंग इकाइयों, मिठाई विक्रेताओं और अन्य संस्थागत खरीदारों पर लागू होगा, जिनकी पिछले एक साल में औसत मासिक चीनी खपत कम से कम 10 टन रही है।
महाराष्ट्र में मुंबई और कोल्हापुर दोनों बाजारों में चीनी के भाव 200 रुपये प्रति 100 किलोग्राम घटे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में कीमतें 50-120 रुपये प्रति 100 किलोग्राम घटीं।
हालाँकि उत्तराखंड मे कीमतों में मामूली बढ़त देखने को मिली।
जुलाई से चीनी कीमतों में तेजी बनी हुई है और अगस्त में सीमित आपूर्ति तथा पीक डिमांड सीजन से पहले थोक उपभोक्ताओं की मजबूत खरीदारी के कारण तेजी और तेज हुई।
चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी का मुख्य कारण मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और उम्मीद से कम उत्पादन है। सरकार ने कहा कि यह तेजी एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी डायवर्जन के कारण नहीं हुई है। त्योहारी सीजन से पहले सट्टेबाजी और जमाखोरी ने भी कीमतों को ऊपर बढ़ाया।
बाजार फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में है और आयातित चीनी के घरेलू बाजार में पहुंचने का इंतजार कर रहा है। आयातित स्टॉक की वास्तविक उपलब्धता के बाद ही कीमतों की अगली दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
देखने वाली बात है कि रिकॉर्ड भाव पहुंचे के बाद भी अतिरिक्त बिक्री मासिक कोटा आवंटित नहीं किया गया जिससे प्रतीत होता है कि स्टॉक को ले कर कुछ सावधानियां बरती जा रहीं हैं।
