चावल और मक्का का उत्पादन घटने की संभावना

09-Sep-2026 05:25 PM

नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान धान के क्षेत्रफल में काफी गिरावट आई है और मानसून का प्रदर्शन भी उत्साहवर्द्धक नहीं है। इससे धान-चावल के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है। धान की रोपाई लगभग समाप्त हो चुकी है। इसका उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 438.19 लाख हेक्टेयर से 16.37 लाख हेक्टेयर या करीब 4 प्रतिशत 421.82 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। 

अल नीनो का प्रभाव आगामी महीनों में पीक या चरम पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। भारत में दक्षिण-पश्चिम  मानसून पर इसका असर पहले से ही देखा जा रहा है जबकि अक्टूबर-सितम्बर 2026 में उत्तर-पूर्व मानसून भी इससे प्रभावित होने की आशंका है। इससे रबी कालीन धान की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उत्तर-पूर्व मानसून की अधिकांश बारिश दक्षिणी राज्यों में होती है। जिसका फायदा उठाकर वहां किसान रबी कालीन धान की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं। यदि इस बार बारिश कम हुई तो वहां इसकी खेती पर असर पड़ सकता है। 

उल्लेखनीय है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा कम होने से दक्षिण भारत के चारों प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों-तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक एवं तमिलनाडु में धान का रकबा घट गया है। तेलंगाना धान-चावल के शीर्ष उत्पादक  राज्यों में शामिल है। 

जहां तक मक्का की बात है तो मौजूदा खरीफ सीजन में इसके बिजाई क्षेत्र में भी 3 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। इसका रकबा गत वर्ष के 94.10 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 91.10 लाख हेक्टेयर रह गया है। मक्का की खेती भी खरीफ और रबी- दोनों सीजन में होती है। 

उस्डा पोस्ट ने 2025-26 की तुलना में 2026-27 सीजन के दौरान भारत में चावल एवं मक्का के उत्पादन में संयुक्त रूप से 120 लाख टन की गिरावट आने का अनुमान लगाया है। इसके तहत चावल का उत्पादन 1540 लाख टन से 70 लाख टन घटकर 1470 लाख टन तथा मक्का का उत्पादन 550 लाख टन से 50 लाख टन गिरकर 500 लाख टन रह जाने की संभावना व्यक्त की गई है।