बायोडीजल निर्माण में पाम तेल का उपयोग बढ़ने से भारत पर पड़ेगा असर
08-May-2026 08:48 PM
मुम्बई। पाम तेल के तीनों शीर्ष देश- इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड में बायो डीजल के निर्माण में इस महत्वपूर्ण वनस्पति तेल का उपयोग बढ़ाने का प्लान बनाया जा रहा है। इंडोनेशिया सरकार ने इसकी घोषणा भी कर दी है। वर्तमान समय में वहां बायो डीजल निर्माण में 40 प्रतिशत पाम तेल के अनिवार्य मिश्रण का नियम लागू है जबकि 1 जुलाई 2026 से इसका स्तर बढ़कर 50 प्रतिशत हो जाएगा।
इसका मतलब यह हुआ कि जुलाई से इंडोनेशिया में जो जैव ईंधन बनेगा उसमें 50 प्रतिशत डीजल तथा 50 प्रतिशत पाम तेल का मिश्रण शामिल होगा। इंडोनेशिया दुनिया में पाम तेल का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है और भारत में सर्वाधिक पाम तेल वही से मंगाया जाता है।
बायोडीजल में खपत तेजी से बढ़ने पर इंडोनेशिया में खाद्य उद्देश्य के लिए पाम तेल का स्टॉक घट सकता है जिससे उसके निर्यात में भी कमी आ सकती है और कीमत में बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके कुछ अग्रिम संकेत मिलने लगे हैं। बेंचमार्क क्रूड पाम तेल का वायदा भाव ऊंचा एवं तेज होता जा रहा है जिसके असर से इंडोनेशिया एवं थाईलैंड में भी दाम बढ़ने लगा है। उधर सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल के वैश्विक बाजार मूल्य में भी तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है।
मलेशिया में फिलहाल बायोडीजल के निर्माण में 12 प्रतिशत पाम तेल का उपयोग हो रहा है जिसे जल्दी ही बढ़ाकर 15 प्रतिशत नियत किए जाने की संभावना है। भविष्य में मिश्रण का स्तर क्रमिक रूप से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक पहुंचाया जा सकता है। इससे उसके पाम तेल निर्यात पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ सकता है और भारत की कठिनाई भी बढ़ सकती है क्योंकि यहां मलेशिया से भी पाम तेल की विशाल मात्रा का आयात किया जाता है।
इसी तरह हाल के वर्षों में थाईलैंड भी भारत को पाम तेल की आपूर्ति करने वाले एक महत्वपूर्ण देश के रूप में उभरा है। थाईलैंड सरकार भी बायोडीजल निर्माण में पाम तेल का मिश्रण बढ़ाने पर विचार कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण क्रूड खनिज तेल का कारोबार प्रभावित हो रहा है और भाव बढ़ रहा है। भारत दुनिया में पाम तेल का सबसे बड़ा आयातक देश बना हुआ है।
