बेहतर उत्पादन एवं ऊंचे स्टॉक के कारण दलहनों के आयात में भारी गिरावट
12-Feb-2026 03:31 PM
मुम्बई। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में दलहनों का आयात तेजी से उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था जबकि बेहतर घरेलू उत्पादन एवं ऊंचे स्टॉक के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में आयात में जोरदार गिरावट आने के संकेत मिल रहे हैं।
चालू वित्त वर्ष के आरम्भिक आठ महीनों में यानी अप्रैल-नवम्बर 2025 के दौरान भारत में दलहनों का कुल आयात 32.60 लाख टन पर अटक गया जो वर्ष 2024 के इन्हीं महीनों के आयात 42.20 लाख टन से करीब 23 प्रतिशत कम था। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत में दलहनों का कुल आयात बढ़कर 73 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।
उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष के दौरान हुए रिकॉर्ड आयात का पूरा उपयोग नहीं हो पाया और इसलिए मौजूदा वित्त वर्ष में दलहनों का बकाया स्टॉक ऊंचा हो गया। इसके साथ-साथ घरेलू उत्पादन का परिदृश्य भी बेहतर नजर आ रहा है।
इसे देखते हुए वर्तमान वित्त वर्ष की पूरी अवधि में यानी अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान दलहनों का कुल आयात 45 लाख टन के आसपास सिमट जाने की संभावना है। मोटे अनुमान के अनुसार दिसम्बर 2025 एवं जनवरी 2026 में करीब 7 लाख टन दलहन मंगाया गया।
भारत की कम खरीद से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दलहनों का भाव नरम पड़ गया। पीली मटर का वैश्विक बाजार भाव गत वर्ष के 400 डॉलर प्रति टन से घटकर वर्तमान समय में 300 डॉलर प्रति टन के करीब रह गया है। इसी तरह देसी चना का दाम 700 डॉलर प्रति टन से लुढ़ककर 520 डॉलर प्रति टन पर आ गया है।
2024-25 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 के शुरुआती आठ महीनों में तुवर का आयात 5 प्रतिशत फिसलकर 9.40 लाख टन, मसूर का आयात 24 प्रतिशत गिरकर 4 लाख टन, पीली मटर का आयात 52 प्रतिशत लुढ़ककर 7.50 लाख टन तथा उड़द का आयात 43 प्रतिशत घटकर 7.50 लाख टन रह गया। भारत में दलहनों का आयात मुख्यतः कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार, अफ्रीकी देशों, ब्राजील तथा रूस आदि से किया जाता है।
