भारतीय रिफानर्स खाद्य तेलों की खरीद के प्रति सतर्क
24-Mar-2026 09:03 PM
मुम्बई। ईरान-अमरीका युद्ध से उत्पन्न संकट के कारण वैश्विक बाजार में पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल का भाव ऊंचा हो गया है जिसे देखते हुए भारतीय रिफाइनर्स सावधान हो गए हैं।
उन्हें लगता है कि कीमतों में आई तेजी ज्यादा दिनों तक बरकरार नहीं रहेगी और इसलिए वे इसकी खरीद में कटौती कर रहे हैं। इसके बजाए रिफाइनर्स स्वदेशी स्रोतों से खाद्य तेल की खरीद बढ़ाने कर प्रयास कर सकते हैं ताकि तिलहन उत्पादकों को भी कुछ राहत मिल सके।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे प्रमुख आयातक देश है। इसकी खरीदारी कम होने पर पाम तेल एवं सोया तेल का वैश्विक बजार भाव कुछ नरम पड़ सकता है।
दूसरी ओर इससे स्वदेशी क्रशिंग-प्रोसेसिंग उद्योग तथा तिलहन उत्पादक किसानों को फायदा मिल सकता है।
चालू माह के आरंभ में पाम तेल का वायदा भाव बढ़कर पिछले एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया था क्योंकि मध्य-पूर्व में जारी संकट के कारण क्रूड खनिज तेल की कीमतों में होने वाली वृद्धि से यह संभवना बढ़ सकता है।
एक अग्रणी आयातक का कहना है कि खाद्य तेल की खरीद में जल्दबाजी दिखाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि वैश्विक बाजार में इसका पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और ईरान युद्ध खत्म होने के बाद कीमतों में जोरदार गिरावट आ सकती है।
2024-25 के मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान भारत में प्रति माह औसतन 13.60 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया गया। मार्च 2026 में खाद्य तेलों का आयात घटकर 11 लाख टन के करीब सिमट सकता है जिसमें 6.80 लाख टन पाम तेल भी शामिल होने की संभावना है।
