भारतीय मसालों की खरीद में अमरीकी आयातकों की नगण्य दिलचस्पी
24-Mar-2026 08:54 PM
कोच्चि। अमरीका भारतीय मसालों के अग्रणी खरीदार देशों में शामिल है लेकिन फिलहाल उसके आयातक इसकी खरीद में नगण्य दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
अमरीका में भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क अब 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत रह गया है जिससे वहां मसालों का निर्यात बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन कुछ खास कारणों से अमरीकी आयातक भारतीय निर्यातकों को नयी आर्डर नहीं दे रहे हैं।
समझा जाता है कि ईरान-इजरायल युद्ध इसका प्रमुख कारण है। अमरीका लगभग 50 करोड़ डॉलर मूल्य के मसालों तथा मसाला उतपदों का भारत से वार्षिक आयात करता है इसलिए उसके आयातकों की उदासीनता से भारत का चिंतित होना स्वाभाविक है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार यदि लम्बे समय तक अमरीका भारतीय मसालों की खरीद से दूर रहा तो घरेलू बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने तथा कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना उत्पन्न हो सकती है। बेशक भारतीय निर्यातक अन्य वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहे हैं।
लेकिन अमरीका की कमी को पूरा करना काफी कठिन हो सकता है। शिपिंग खर्च बढ़ने तथा व्यापार मार्ग पर अनिश्चितता का वातावरण रहने से कारोबार पर असर पड़ रहा है। दूसरे रास्ते से माल भेजना का विकल्प और भी महंगा साबित होगा और उसमें समय भी ज्यादा लगेगा। होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता लगभग बंद हो गया है।
एक निर्यातक का कहना है कि 28 फरवरी 2026 को ईरान अमरीका युद्ध आरंभ होने के बाद से किसी अमरीकी आयातक ने मसालों का आर्डर देने के लिए भारतीय निर्यातक से सम्पर्क नहीं किया है। इससे निर्यातक चिंतित तो हैं लेकिन साथ ही साथ उन्हें शीघ्र ही हालात सामान्य हो जाने की उम्मीद भी है।
