अगले सीजन में भारत से बढ़ सकता है चावल का निर्यात

15-May-2024 06:05 PM

नई दिल्ली । सितम्बर 2022 से 100 प्रतिशत टूटे चावल तथा जुलाई 2023 से गैर बासमती चावल के व्यापरिक निर्यात पर पूर्व प्रतिबंध लागू होने से भारतीय चावल का निर्यात प्रदर्शन कमजोर पड़ गया है।

यद्यपि भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है और यहां से 150 लाख टन से अधिक चावल का वर्षिक निर्यात होने की संभावना है लेकिन पहले की तुलना में यह मात्रा काफी कम है।

अमरीकी कृषि विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि 2021-22 के दौरान भारत से चावल का कुल निर्यात बढ़कर 220 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था मगर इसके बाद शिपमेंट में गिरावट आने लगी।

अब भारत से केवल बासमती चावल एवं सामान्य श्रेणी के सेला चावल का निर्यात हो रहा है। सेला चावल पर 20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लागू है जबकि बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य 950 डॉलर प्रति टन निर्धारित है।

फिलहाला कच्चे (सफेद) गैर बासमती चावल के निर्यात की अनुमति दिए जाने में संदेह है क्योंकि इसका घरेलू बाजार भाव ऊंचा है। 

अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) के अनुसार 2024-25 के दौरान भारत से चावल का कुल निर्यात बढ़कर 180 लाख टन पर पहुंच सकता है।

इसका कारण यह है कि चालू वर्ष के दौरान देश में मानसून की भरपूर बारिश होने की उम्मीद है जिससे खरीफ सीजन में धान-चावल का शानदार उत्पादन हो सकता है और तब सरकार गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय ले सकती है।  

चीन के बाद भारत दुनिया में चावल का दूसरा सब्बसे बड़ा उत्तपदक एवं उपभोक्ता देश है जबकि इसके निर्यात में पिछले 12-13 वर्षों से नम्बर वन की पोजीशन पर बरकरार है।

थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान, अमरीका एवं म्यांमार जैसे अन्य निर्यातक देश भारत से काफी पीछे है।

भारत में 80 प्रतिशत से अधिक चावल का उत्पादन खरीफ सीजन में होता है जबकि शेष उत्पादन रबी सीजन एवं जायद सीजन के दौरान होता है। अगले महीने से मानसून की प्रथम बारिश के साथ धान की रोपाई आरंभ होने की संभावना है।