युद्ध के चलते शिपिंग शुल्क बढ़ने पर बासमती निर्यातकों ने सरकार से राहत मांगी
06-Apr-2026 08:47 AM
युद्ध के चलते शिपिंग शुल्क बढ़ने पर बासमती निर्यातकों ने सरकार से राहत मांगी
★ बासमती चावल निर्यातकों ने युद्ध से उत्पन्न व्यवधान के कारण बढ़ते शिपिंग शुल्क पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। निर्यातकों को भारी लागत, शिपमेंट में देरी और ऑर्डर रद्द होने के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
★ समुद्र और बंदरगाहों पर फंसे कंटेनरों पर डिटेंशन, डेमरेज और स्टोरेज चार्ज तेजी से बढ़ गए हैं। इससे विशेषकर खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता खराब होने और अनुबंध उल्लंघन का खतरा बढ़ गया है।
★ BFDF ने सरकार से अनुरोध किया है कि 1 मार्च से मौजूदा स्थिति को फोर्स मेज्योर घोषित किया जाए और शिपिंग लाइनों व पोर्ट अथॉरिटीज को ऐसे शुल्क माफ करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, वॉर रिस्क सरचार्ज (WRS) को पूर्व प्रभाव से लागू करने का विरोध करते हुए इसे केवल भविष्य के लिए लागू करने की मांग की गई है।
★ देरी शिपिंग कंपनियों के फैसलों और बाहरी भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण हुई है, इसलिए ऐसे शुल्क लगाना कानूनी रूप से उचित नहीं है। इसका सबसे अधिक असर MSME निर्यातकों पर पड़ा है, जो खाड़ी देशों के बाजार पर निर्भर हैं। कुछ मामलों में कंपनियों पर करीब ₹30 लाख तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।
★ निर्यातकों ने विवादों के समाधान और कंटेनरों की शीघ्र रिहाई के लिए सरकार, शिपिंग कंपनियों और उद्योग के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाने की भी मांग की है।
