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27 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य चीनी उद्योग की पहुंच से बाहर

29-Sep-2026 08:01 PM

27 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य चीनी उद्योग की पहुंच से बाहर

नई दिल्ली। बेशक केन्द्र सरकार ने क्रमिक रूप से पेट्रोल में  एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य बढ़ाते हुए 27 प्रतिशत तक पहुंचाने की घोषणा की है मगर जानकारों का कहना है कि यह लक्ष्य चीनी उद्योग की पहुंच से बाहर है और इससे उद्योग के समक्ष एक नई किस्म की समस्या उत्पन्न हो सकती है। 

दरअसल देश में गन्ना की पैदावार घटती बढ़ती रहती है और सरकार एथनॉल के बजाए चीनी के उत्पादन संवर्धन को प्राथमिकता देना चाहती है। 2024-25 एवं 2025-26 के लगातार दो सीजन में चीनी का उत्पादन घरेलू मांग एवं खपत से कम होने के कारण इस बार भारत को लगभग एक दशक में पहली बार विदेशों से चीनी का आयात करने के लिए विवश होना पड़ा। इसे देखते हुए सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला करके गंभीर जोखिम नहीं उठाना चाहेगी क्योंकि इससे चीनी उद्योग की कमजोरी सामने आ जाएगी इस बार भी स्थिति खराब ही दिखाई पड़ती है।

यह सही है कि एथनॉल के निर्माण में गन्ना अवयवों- गन्ना जूस एवं सीरप, बी हैवी शीरा तथा सी हैवी शीरा के अलावा मक्का, चावल, अन्य क्षतिग्रस्त अनाज एवं खराब क्वालिटी के आलू का भी उपयोग बड़े पैमाने पर होता है इसलिए 27 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल करने में सिर्फ चीनी उद्योग का ही योगदान नहीं रहेगा लेकिन इसकी महत्वपूर्ण भूमिका अवश्य रहेगी। एथनॉल उत्पादन में मक्का / चावल का इस्तेमाल बढ़ रहा है जबकि गन्ना अवयवों के उपयोग में कमी / वृद्धि होती रहती है।

सभी अवयवों से निर्मित एथनॉल के लिए आपूर्ति का अलग-अलग कोटा नियत किया जाता है। सरकार को गन्ना से निर्मित एथनॉल का कोटा बढ़ाने का निर्णय लेना आसान नहीं होगा।

उद्योग समीक्षकों के अनुसार नियत समय से 5 वर्ष पूर्व ही 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य हासिल करना एक नीतिगत विजय है लेकिन इससे सरकार को एक सीख भी मिली है।