उत्तरी राज्यों में कमजोर बिजाई से कपास का क्षेत्रफल गत वर्ष से पीछे
18-Jun-2026 10:25 AM
नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष 12 जून तक कपास का कुल घरेलू उत्पादन क्षेत्र 9.53 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 13.19 लाख हेक्टेयर से 28 प्रतिशत कम था। कर्नाटक, गुजरात एवं राजस्थान सहित अन्य प्रांतों के कुछ हिस्सों में कपास की बिजाई आरंभ हो चुकी है।
उत्तरी भारत में कपास का क्षेत्रफल करीब 22 प्रतिशत घट गया है। इसके तहत खासकर पंजाब और हरियाणा में रकबा काफी सीमित रहा है क्योंकि वहां किसान धान की खेती को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
पंजाब-हरियाणा में विभिन्न कारणों से कपास की खेती किसानों के लिए नुकसान दायक साबित हो रही है। दूसरी ओर धान एक ऐसा उत्पाद है जिसकी बिक्री के प्रति किसान निश्चिंत रहते हैं और उसे बेहतर आमदनी भी प्राप्त होती है। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों से विशाल मात्रा में प्रति वर्ष धान की खरीद करती है।
उत्तरी संभाग के तीनों उत्पादक प्रांतों- पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान में इस बार कपास का उत्पादन क्षेत्र 9 लाख हेक्टेयर के करीब ही पहुंच सका जबकि पिछले साल 11.56 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया था।
उत्तरी क्षेत्र में कपास की अगैती खेती अप्रैल-मई में होती है और अब वहां बिजाई की प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है। पंजाब में 11 जून तक कपास का उत्पादन क्षेत्र एक लाख हेक्टेयर से भी घटकर 80 हजार हेक्टेयर के करीब रह गया जबकि गत वर्ष 1.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था।
इसी तरह हरियाणा में बिजाई क्षेत्र पिछले साल के 3.94 लाख हेक्टेयर से गिरकर इस बार 2.92 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। राजस्थान में भी क्षेत्रफल गत वर्ष के 6.43 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस वर्ष 5.28 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सका जबकि वहां रकबा बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी।
