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28-Sep-2026 01:26 PM
नई दिल्ली दक्षिण-पश्चिम मानसून की विलम्बित अनियमित एवं अनिश्चितता धान का उत्पादन क्षेत्र घटकर 430.93 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो पिछले साल के रिकॉर्ड रकबा 447.25 लाख हेक्टेयर से करीब 4 प्रतिशत या 16.32 लाख हेक्टेयर कम है वैसे धान का यह रकबा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से काफी अधिक है 2025-26 का खरीफ सीजन अपवाद रहा था जब धान का उत्पादन क्षेत्र तेजी से उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।
गत वर्ष की तुलना में चालु खरीफ सीजन के दौरान दक्षिण भारत के चारों प्रमुख उत्पादक राज्यों-तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश एवं तमिलनाडु में मानसून की बारिश कम होने तथा बांधो-जलाशयों में पानी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं रहने से धान के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट आ गई। इसके आलावा उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र एवं झारखंड जैसे राज्यों में भी धान की खेती कम क्षेत्रफल में हुई है। हालांकि अब दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई मात्रा के क्रम में देश के कई राज्यों में भारी वर्षा हो रही है मगर धान की फसल में पहले जो नुकसान हो चुका है उसकी भरपाई होना कठिन है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि घरेलू उत्पादन में भारी कमी आने की संभावना के बावजूद केंद्र सरकार ने धान की खरीद के लक्ष्य में केवल एक लाख टन की मामूली कटौती की है 2025-26 के खरीफ मार्केटिंग सीजन में 720.50 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य नियत किया गया था जबकि 2026 -27 सीजन में 720.50 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य नियत किया गया था जबकि 2026-27 सीजन के लिए 719.20 लाख टन की खरीद का लक्ष्य रखा गया है।