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खरीफ कालीन तिलहनों के शानदार उत्पादन में संदेह

28-Sep-2026 12:08 PM

खरीफ कालीन तिलहनों के शानदार उत्पादन में संदेह

नई दिल्ली। हालांकि कुल मिलाकर इस बार खरीफ कालीन तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से थोड़ा ऊपर पहुंच गया है लेकिन अनेक क्षेत्रों में मौसम तथा मानसून की हालत अनुकूल नहीं होने से तिलहनों का शानदार उत्पादन होने में संदेह है। ध्यान देने की बात है कि गत वर्ष की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन तथा अरंडी के बिजाई क्षेत्र में कमी आई है और तिलहन सूरजमुखी का रकबा बढ़ा है जबकि मूंगफली का क्षेत्रफल गत वर्ष के बराबर ही रहा।

आई ग्रेन इण्डिया के डायरेक्टर राहुल चौहान का कहना है कि सिर्फ बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होना ही किसी फसल के शानदार उत्पादन की गारंटी नहीं होती है बल्कि इसके लिए मौसम एवं वर्षा का अनुकूल रहना तथा फसल को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहना भी जरुरी होता है।

दक्षिण -पश्चिम मानसून के आरंभिक एवं मध्यवर्ती चरण में कई क्षेत्र अनावृष्टि के शिकार हो गए जिससे खासकर महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तेलंगाना आदि मुख्य रूप से शामिल हैं जहां सोयाबीन का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। अब मानसून के लौटने के क्रम में देश के अनेक राज्यों में अत्यन्त मूसलाधार बारिश हो रही है क्योंकि ये फसलें अब परिपक्व होकर कटाई-तैयारी के चरण में पहुंच रही है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मौजूदा खरीफ सीजन में तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र सुधरकर 195.17 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 195.03 लाख हेक्टेयर से 16 हजार हेक्टेयर ज्यादा है।

इसके तहत तिल का उत्पादन क्षेत्र 9.79 लाख हेक्टेयर से उछलकर 11.09 लाख हेक्टेयर तथा सूरजमुखी का बिजाई क्षेत्र 70 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 1.29 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर सोयाबीन का क्षेत्रफल 123.12 लाख हेक्टेयर से गिरकर 122.24 लाख हेक्टेयर तथा अरंडी का रकबा 9.71 लाख हेक्टेयर से घटकर 8.80 लाख हेक्टेयर रह गया। मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 50.85 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष के बराबर ही रहा।