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28-Sep-2026 10:45 AM
काबुली चना बाजार में निकट अवधि में तेजी की धारणा मजबूत होती दिखाई दे रही है। फरवरी-मार्च में आने वाली नई फसल कमजोर रहने की संभावना, कनाडा सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊंचे भाव तथा आयात लागत बढ़ने से घरेलू बाजार को लगातार समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा मध्य प्रदेश से हाल में कुछ देशों को काबुली चने का निर्यात हुआ है और निर्यात के लिए पूछताछ भी बनी हुई है।
सीमित उपलब्धता से तेजी को समर्थन
भारतीय बंदरगाहों पर पुराने आयातित माल का अधिकांश हिस्सा निकल चुका है। वहीं कनाडा से आने वाला काबुली चना मुंबई, मुंद्रा और कोलकाता जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर ऊंचे भाव पर कारोबार कर रहा है। महंगे आयात के कारण दिल्ली सहित उत्तर भारत की मंडियों में आयातित माल की उपलब्धता सीमित बनी हुई है। मौजूदा परिस्थितियों में काबुली चने में आगे 800/1000 रुपए प्रति क्विंटल तक की और तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निर्यात मांग भी बनी हुई है
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख काबुली चना उत्पादक देशों में पुराने स्टॉक में कमी आने से भारतीय माल की मांग को समर्थन मिल रहा है। तुर्की, ईरान और सीरिया जैसे बाजारों में भारतीय काबुली चने के लिए पूछताछ बनी हुई है। इसके चलते इंदौर और भोपाल लाइन से हाल के दिनों में अच्छी मात्रा में माल निर्यात के लिए गया है। निर्यात मांग और घरेलू खपत दोनों बनी रहने से उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में मंडियों में बिकवाली सीमित रहने पर कीमतों को और मजबूती मिल सकती है।
उत्पादन में बड़ी कमी का अनुमान
काबुली चने के उत्पादन को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है। सामान्य वर्षों में देश में काबुली चने का उत्पादन करीब 30-31 लाख मीट्रिक टन के आसपास माना जाता है, जबकि इस वर्ष उत्पादन घटकर लगभग 22-23 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। पुराना स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद घरेलू खपत और निर्यात मांग को देखते हुए मौजूदा उपलब्धता पर्याप्त नहीं दिखाई दे रही है। यही स्थिति बाजार में तेजी की धारणा को मजबूत कर रही है।
महाराष्ट्र में भाव मजबूत
महाराष्ट्र में बिना छंटाई वाले मध्यम क्वालिटी के काबुली चने के भाव करीब ₹7,200-7,700 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। मोटे माल में भी करीब ₹500-600 प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई है। निचली क्वालिटी के माल में भी गुणवत्ता के अनुसार भाव मजबूत हुए हैं। महंगे घरेलू चने के कारण हल्की एवं छोटे दाने वाली काबुली चने की मांग में भी सुधार देखने को मिल रहा है। अन्य दलहनों के ऊंचे भाव ने भी काबुली चने की खपत को कुछ हद तक बढ़ाया है।
नई फसल में अभी समय
नई काबुली चना फसल की आवक में अभी लगभग पांच महीने का समय बाकी है। आगामी माह से बिजाई शुरू होने की संभावना है। जिन क्षेत्रों में हाल में बारिश की कमी थी, वहां अच्छी बारिश होने से आगामी बिजाई के लिए परिस्थितियों में सुधार हुआ है। हालांकि नई फसल का वास्तविक उत्पादन मानसून के बाद की मौसम परिस्थितियों, बिजाई क्षेत्र और प्रति हेक्टेयर उत्पादकता पर निर्भर करेगा।
बाजार का निष्कर्ष
काबुली चने में फिलहाल कमजोर उपलब्धता, संभावित कम उत्पादन, महंगा आयात और निर्यात मांग चार प्रमुख तेजी के कारक बने हुए हैं। पुराने स्टॉक में कमी और नई फसल की लंबी प्रतीक्षा के कारण निकट अवधि में बाजार में मजबूती बनी रहने की संभावना है।