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01-Oct-2026 05:32 PM
नई दिल्ली। चालू वर्ष के शुरूआती सात महीनों में यानी जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान भारत में अरहर (तुवर) का आयात उछलकर 5.79 लाख टन पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के आयात 4.01 लाख टन से 44 प्रतिशत अधिक रहा। इस अवधि में अफ्रीकी देश- मोजाम्बिक से सर्वाधिक 2.18 लाख टन तुवर का आयात हुआ। इसके बाद म्यांमार से 1.35 लाख टन, तंजानिया से 1.04 लाख टन तथा सूडान से 68,499 टन तुवर का आयात किया गया। शेष आयात अन्य देशों से हुआ।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 की तुलना में 2025 के दौरान भारत में तुवर का कुल आयात 5.42 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13.25 लाख टन पर पहुंचा था। अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एन्ड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में 2026 के खरीफ सीजन में अरहर के बिजाई क्षेत्र में कुछ बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन दोनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में भयंकर सूखे से फसल प्रभावित होने की आशंका है जिससे इसके उत्पादन के प्रति चिंता बढ़ती जा रही है।
हालांकि उद्योग- व्यापार क्षेत्र के विश्लेषक इस बार तुवर का उत्पादन घटने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं लेकिन अभी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने का समय नहीं आया है। सितम्बर में बारिश हुई जिससे फसल को थोड़ी राहत मिली। अगले दो ढाई माह के बाद तुवर की नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ होगी इसलिए अभी लम्बा समय बाकी है।
राष्ट्रीय स्तर पर तुवर का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 45.95 लाख हेक्टेयर से बढ़कर मौजूदा खरीफ सीजन में 47.25 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसका बिजाई क्षेत्र कर्नाटक में 15.33 लाख हेक्टेयर से 6 प्रतिशत गिरकर 14.16 लाख हेक्टेयर तथा महाराष्ट्र में क्षेत्रफल 12.21 लाख हेक्टेयर से 1.5 प्रतिशत गिरकर 12.02 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। दूसरी ओर इसका उत्पादन क्षेत्र उत्तर प्रदेश में 2.97 लाख हेक्टेयर से 11 प्रतिशत बढ़कर 3.30 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड एवं छत्तीसगढ़ में भी रकबा कुछ बढ़ा है।