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पहली तिमाही में मसालों का निर्यात 26 प्रतिशत घटा

01-Oct-2026 07:22 PM

पहली तिमाही में मसालों का निर्यात 26 प्रतिशत घटा

कोच्चि। मसाला बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यानी अप्रैल-जून 2026 के दौरान देश से मसालों का कुल निर्यात घटकर 4,87,688 टन पर अटक गया जो पिछले साल की इसी अवधि के शिपमेंट 6,54,936 टन से करीब 26 प्रतिशत कम रहा।

लेकिन दूसरी ओर इसकी निर्यात आय 4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 138.19 अरब रुपए पर पहुंच गई। निर्यात आमदनी में हुई वृद्धि का कारण मसालों का निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचा होना तथा रुपया की विनिमय दर का नीचे रहना है। 

समीक्षाधीन अवधि के दौरान जिन मसालों के निर्यात में भारी गिरावट आई उसमें जायफल-जावित्री, जीरा, धनिया, लहसुन एवं मेथी आदि शामिल है। दूसरी ओर इसी अवधि में हल्दी, इमली तथा मिंट उत्पादों के निर्यात में कुछ बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 के मुकाबले 2026 में अप्रैल-जून के दौरान जायफल- जावित्री का निर्यात 1486 टन से घटकर 1036 टन, जीरा का शिपमेंट 78,278 टन से घटकर 58,821 टन, धनिया का निर्यात 23,447 टन से लुढ़ककर 18,678 टन, लहसुन का शिपमेंट 16,260 टन से गिरकर 13,228 टन और मेथी का निर्यात 16,943 टन से उछलकर 12,841 टन पर सिमट गया।

दूसरी ओर इसी अवधि में हल्दी का निर्यात 63,020 टन से सुधरकर 65,476 टन, इमली का निर्यात 15,897 टन से सुधरकर 16,242 टन तथा मिंट उत्पादों का निर्यात  7757 टन से बढ़कर 8477 टन पर पहुंच गया। 

इसके अलावा भारत से लालमिर्च, कालीमिर्च, छोटी बढ़ी इलायची एवं सौंफ सहित कई अन्य मसालों एवं मूल्य संवर्धित मसाला उत्पादों का भी निर्यात हुआ जिससे अच्छी आमदनी प्राप्त हुई। उल्लेखनीय है कि मसालों के संवर्ग में निर्यात की मात्रा एवं आमदनी की दृष्टि से लालमिर्च प्रथम स्थान पर रहता है। भारत मसालों का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश है।