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24-Sep-2026 07:07 PM
हैदराबाद। दक्षिण भारत के एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- तेलंगाना में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान सामान्य औसत से काफी कम बारिश होने तथा वर्षा का वितरण भी असमान रहने से इस वर्ष खरीफ फसलों का सकल उत्पादन क्षेत्र घटकर 125.60 लाख एकड़ पर अटक गया जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 1.33 लाख एकड़ से करीब 6 प्रतिशत कम है। इस वर्ष राज्य में खरीफ फसलों का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 132.40 लाख एकड़ आंका गया है जिसके सापेक्ष 95 प्रतिशत क्षेत्र में बिजाई पूरी हो सकी।
राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में इस बार खरीफ कालीन दलहन एवं तिलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में कुल मिलाकर वृद्धि हुई मगर धान एवं मोटे अनाजों का रकबा घट गया।
खरीफ सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न धान का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 67 लाख एकड़ से 10 लाख एकड़ या करीब 16 प्रतिशत लुढ़ककर इस बार 57 लाख एकड़ पर सिमट गया जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्य में मानसूनी बारिश का भारी अभाव रहा। धान एवं मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 74.10 लाख एकड़ से घटकर इस बार 62.90 लाख एकड़ रह गया। मक्का का बिजाई क्षेत्र 6.44 लाख एकड़ से गिरकर 5.93 लाख एकड़ एवं ज्वार का क्षेत्रफल 36,239 एकड़ से फिसलकर 35,418 एकड़ पर अटक गया।
जहां तक दलहन फसलों की बात है तो इसका कुल रकबा 5.84 लाख एकड़ से बढ़कर 7.95 लाख एकड़ हो गया। इसके तहत तुवर का उत्पादन क्षेत्र 4.92 लाख एकड़ से बढ़कर 5.58 लाख एकड़, मूंग का बिजाई क्षेत्र 62 हजार एकड़ से उछलकर 1.61 लाख एकड़ तथा उड़द का क्षेत्रफल 29 हजार एकड़ से बढ़कर 71 हजार एकड़ पर पहुंच गया।
तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र भी 3.75 लाख एकड़ से बढ़कर 3.96 लाख एकड़ पर पहुंचा। इसके तहत खासकर सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 3.62 लाख एकड़ से बढ़कर 3.72 लाख एकड़ पर पहुंच गया। इसी तरह कपास का क्षेत्रफल भी गत वर्ष के 45.90 लाख एकड़ से उछलकर इस बार 48.30 लाख एकड़ हो गया।