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24-Sep-2026 05:07 PM
हैदराबाद। क्षेत्रफल में गिरावट आने तथा बारिश की कमी से उपज दर एवं पैदावार घटने से प्रीमियम क्वालिटी (ए ग्रेड) के धान के उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है जिससे इसके चावल की कीमतों में तेजी मजबूती का माहौल बना हुआ है। उसके तहत फाइन एवं सुपर फाइन वैरायटी के सोना मसूरी, पोन्नी तथा स्वर्णा जैसे चावल के दाम में ज्यादा वृद्धि हुई है।
दक्षिण भारत में न केवल धान का क्षेत्रफल चारों प्रमुख उत्पादक राज्यों- तेलंगाना आंध्र प्रदेश, कर्नाटक एवं तमिलनाडु में घटा है बल्कि मानसून की वर्षा का भी काफी अभाव रहा है। महाराष्ट्र में भी काफी कम बारिश हुई है। उपरोक्त किस्मों के चावल का भाव गत वर्ष के मुकाबले फिलहाल करीब 10 से 25 प्रतिशत तक ऊंचा चल रहा है।
दक्षिण भारत में सोना मसूरी चावल बहुत लोकप्रिय है और वहां इसकी भारी खपत होती है। गत वर्ष इस चावल का औसत मूल्य 44 रुपए प्रति किलो था जो अब 25 प्रतिशत उछलकर 58 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। इसी तरह स्वर्णा चावल का दाम 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 35 रुपए प्रति किलो हो गया है। पूर्वी क्षेत्र में इसका ज्यादा उपयोग होता है।
उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार उत्पादन घटने की आशंका से प्रीमियम ग्रेड के चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता के प्रति चिंता बढ़ती जा रही है। दक्षिणी राज्यों में वर्षा की कमी से बांधों-जलाशयों में जल स्तर नीचे है, बिहार सहित कुछ अन्य राज्यों में बाढ़ का गंभीर प्रकोप देखा जा रहा है और उत्तरी क्षेत्र के कुछ इलाकों में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
केन्द्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार गत वर्ष की तुलना में इस बार चावल के औसत मूल्य में करीब 7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और यह 46.44 रुपए प्रति किलो पर पहुंचा है लेकिन अच्छी क्वालिटी के सामान्य श्रेणी (गैर बासमती) वाले चावल की कीमतों से उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें भी उत्तरी क्षेत्र के मुकाबले दक्षिणी राज्यों में चावल ज्यादा महंगा हुआ है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर धान का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 445.92 लाख हेक्टेयर से 3.7 प्रतिशत या 16.64 लाख हेक्टेयर घटकर चालू खरीफ सीजन में 429.28 लाख हेक्टेयर रह गया है।