सोयाबीन का भाव उछलने से सोया मील के निर्यात पर संकट
26-May-2026 06:29 PM
मुम्बई। प्रमुख उत्पादक राज्यों की थोक मंडियों में सोयाबीन का भाव काफी ऊंचा एवं तेज होने से सोयामील का लागत खर्च बहुत बढ़ गया है। इसके फलसरूप निर्यातकों को पहले नीचे मूल्य पर सोयामील के लिए गए अनुबंध को कैंसिल करना पड़ रहा है। एक तरफ वर्ष 2021 के बाद पहली बार भारतीय निर्यातकों को 25 हजार टन सोयामील के निर्यात का सौदा तोड़ना पड़ा है तो दूसरी ओर अफ्रीकी देशों से 80 हजार टन सोयाबीन के आयात का अनुबंध भारतीय आयातकों द्वारा किया गया है।
घरेलू प्रभाग में सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी भाव तेजी से उछलकर 7000 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गया है और अब 8000 रुपए की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इतने ऊंचे दाम पर खरीदे गए सोयाबीन से निर्मित सोया मील के निर्यात ऑफर मूल्य को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखना मुश्किल है। भारत से सोयामील का निर्यात सौदा कैंसिल होने से अर्जेन्टीना, ब्राजील एवं अमरीका के आपूर्तिकर्ताओं को फायदा होने की संभावना है।
परम्परागत खरीदार एशियाई देशों में भारतीय सोयामील का निर्यात प्रदर्शन लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है जिससे अन्य निर्यातक देशों को वहां अपनी पकड़ मजबूत बनाने में मदद मिल रही है।
दूसरी ओर भारत की जोरदार मांग निकलने से अफ्रीका के आपूर्तिकर्ताओं को ऊंचे दाम पर सोयाबीन का निर्यात बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल जाएगा।
जानकार सूत्रों के अनुसार जिस समय सोयामील का निर्यात अनुबंध हुआ था उसके मुकाबले इसका दाम अब करीब 200 डॉलर प्रति टन ऊंचा हो चुका है।
निर्यातक इतना बड़ा घाटा नहीं उठा सकते थे और आयातक ऊंचा दाम चुकाने के लिए तैयार नहीं थे इसलिए दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से मई एवं जून शिपमेंट के लिए हुए अनुबंध को निरस्त करने का निर्णय ले लिया। पिछले एक माह में सोयामील का भाव 41 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि के साथ 66000 रुपए प्रति टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया।
