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21-Sep-2026 07:46 PM
मुम्बई। तिलहन-तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक अग्रणी संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) का कहना है कि खरीफ कालीन तिलहन फसलों की बिजाई लगभग समाप्त होने के बाद जो तस्वीर उभरकर सामने आई है वह काफी हद तक संतोषजनक है।
तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 18 सितम्बर तक 194.76 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 194.75 लाख हेक्टेयर के बराबर ही है। वर्ष 2025 के पूरे खरीफ सीजन में तिलहनों का सकल क्षेत्रफल 196.38 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था।
अल नीनो मौसम चक्र के समय मानसून की कमजोर स्थिति तथा जून में बारिश में भारी कमी के चलते बिजाई में हुई देरी के बावजूद तिलहनों का रकबा गत वर्ष के बराबर होना निश्चित रूप से अच्छी खबर मानी जाएगी। तेल- उद्योग बिजाई के आंकड़े से संतुष्ट है।
हालांकि दोनों प्रमुख खरीफ कालीन तिलहन फसलों- सोयाबीन एवं मूंगफली की बिजाई गत वर्ष से कम क्षेत्रफल में हुई है लेकिन रकबे में यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है। किसान के लिए चिंता का असली कारण मौसम एवं मानसून की दशा है।
आगामी समय में तिलहनों एवं खाद्य तेलों की आपूर्ति एवं उपलब्धता का आंकलन करते समय बिजाई के साथ-साथ फसल की प्रगति एवं कुल संभावित पैदावार को भी ध्यान में रखा जाएगा क्योंकि मौसम अनुकूल नहीं रहा तो उपज दर में कमी आ सकती है।