पश्चिम एशिया में संकट के बावजूद वैश्विक अर्थ व्यवस्था रहेगी सामान्य

10-Jul-2026 08:23 PM

दुबई। ईरान तथा अमरीका के बीच नए सिरे से घमासान युद्ध शुरू हो जाने के कारण ईरान सहित पश्चिम एशिया, मध्यपूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में कोहराम मचा हुआ है और खासकर एशिया तथा यूरोप के अधिकांश देशों का आयात-निर्यात प्रभावित होने की आशंका है लेकिन इसके बावजूद तमाम वैश्विक संस्थाओं को उम्मीद है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गतिशीलता जारी रहेगी और वैश्विक अर्थ व्यवस्था पर कोई खास प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। 

ईरान-अमरीका के बीच शांति समझौता होने के बाद जून में पेट्रोलियम एवं उर्वरकों के दाम में कमी आ गई थी लेकिन अब इसका भाव पुनः तेज होने लगा है। इसे देखते हुए चार वैश्विक संस्थाओं- अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईए), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) विश्व बैंक समूह (डब्ल्यू  बी जी) तथा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू टी ओ) ने आगाह किया है कि मौजूदा माहौल अनिश्चितता से भरा हुआ है और आगे का परिदृश्य भी बेहतर रहने में संदेह है।

वैसे फिलहाल वैश्विक अर्थ व्यवस्था काफी हद तक स्थिर बनी हुई है और लगभग सभी जरुरी उत्पादों का दाम नियंत्रण में है। पेट्रोलियम एवं रासायनिक उर्वरकों की कीमतों में तेजी के संकेत मिल रहे हैं मगर खाद्य एवं कृषि उत्पादों के दाम में जोरदार वृद्धि नहीं देखी जा रही है। 

पश्चिम एशिया में जब तक लड़ाई जारी रहेगी तब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा बना रहेगा लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीका और ईरान के बीच लड़ाई की अवधि ज्यादा लम्बी नहीं होगी और इसलिए अर्थ व्यवस्था पर भी अधिक असर नहीं पड़ेगा।

रूस और यूक्रेन के बीच पिछले करीब साढ़े चार साल से युद्ध जारी है मगर इससे वैश्विक अर्थ व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई। ईरान-अमरीका युद्ध का असर उससे व्यापक हो सकता था मगर यह सीमित अवधि में खत्म हो सकता है। दरअसल इस लड़ाई में ईरान के साथ-साथ अमरीका को भी जबरदस्त आर्थिक नुकसान हो रहा है इसलिए वह जल्दी ही इसे समाप्त करना चाहेगा।