पश्चिमी एशिया के संकट से यूरिया का घरेलू उत्पादन प्रभावित

31-Mar-2026 01:03 PM

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल के बीच जारी भयंकर युद्ध का असर समूचे अरब क्षेत्र पर पड़ रहा है और भारत में भी इससे यूरिया का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। दो महीने के बाद यानी जून 2026 से खरीफ फसलों की खेती शुरू हो जाएगी और उससे पूर्व देश में इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण रासायनिक उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकार यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। 

उर्वरक मंत्रालय के संयुक्त सचिव का कहना है कि फसल चक्र आरंभ होने से पूर्व यूरिया का स्टॉक जमा करने की दृष्टि से अप्रैल-मई का महीना बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसमें खपत कम होती है। इस अवधि में विदेशों से भारी आयात करके स्टॉक बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

लेकिन इस बार स्थिति भिन्न है। ईरान-इजरायल के बीच एक माह से युद्ध जारी है और निकट भविष्य में इसके समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

इससे निकटवर्ती समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गया है और खाड़ी क्षेत्र के देशों से उर्वरक तथा इसके निर्माण में काम आने वाले अवयवों का आयात बाधित हो रहा है। उर्वरकों की जमाखोरी एवं काला बाजारी पर गहरी नजर रखी जा रही है जबकि अन्य मार्गों से आयात बढ़ाया जा रहा है।