पीएसएस वाले दलहनों के डिस्पोजल नियम में ढील देने का आग्रह

25-Jul-2026 03:23 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को एक पत्र भेजकर मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खरीदे गए दलहनों और खासकर 2025-26 सीजन की तुवर एवं रबी कालीन चना के खुले बाजार बिक्री से सम्बन्धित 9 माह की डिस्पोजल अवधि सम्बन्धी नियम में ढील देने पर विचार करने का आग्रह किया है।

दरअसल दोनों केन्द्रीय एजेंसियां- नैफेड तथा एनसीसीएफ नियमित रूप से अपने स्टॉक से दलहनों के स्टॉक को खुले बाजार में बेच रही है जबकि उपभोक्ता मामले विभाग का कहना है कि खरीफ कालीन दलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में आ रही कमी तथा अल नीनो मौसम चक्र के प्रकोप को देखते हुए उत्पादन में गिरावट की आशंका है इसलिए दलहनों के स्टॉक को सुरक्षित और संरक्षित रखने की आवश्यकता है ताकि आगामी महीनों में जब अभाव की स्थिति उत्पन्न हो तब उसका उपयोग किया जा सके। 

पत्र में कहा गया है कि उपभोक्ता मामले विभाग दलहनों की उपलब्धता एवं कीमतों की उभरती स्थिति पर गहरी नजर रखे हुए है। आरंभिक आंकलन से पता चलता है कि इस बार मौसम एवं मानसून की हालत कुछ हद तक अनिश्चित रह सकती है जिसका असर खरीफ कालीन दलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र एवं कुछ क्षेत्रों में उत्पादन के प्रदर्शन पर पड़ने की संभावना है। फसल उत्पादन की तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। 

पत्र के अनुसार मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए आगामी महीनों में आपूर्ति एवं उपलब्धता में आने वाली संभावित गिरावट को पूरा करने के लिए दलहनों के पर्याप्त स्टॉक को बरकरार रखना आवश्यक है। इस वर्ष उपभोक्ता मामले विभाग ने 3 लाख टन तुवर, 5 लाख टन चना तथा 50 हजार टन उड़द के स्टॉक को पीएसएस से पीएसएफ बफर में ट्रांसफर करने का प्रयास पहले ही शुरू कर दिया है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहनों के इस पूरे स्टॉक की कुल कीमत 5882.50 करोड़ रुपए बैठती है। फंड की कमी के कारण और अधिक स्टॉक का ट्रांसफर करना मुश्किल हो गया है। इसे देखते हुए नैफेड तथा एनसीसीएफ को खुले बाजार में अपने दलहनों का स्टॉक अभी नहीं बेचने के लिए कहा जाना चाहिए। आगामी महीनों में इस स्टॉक की जरूरत पड़ेगी।