पंजाब में कपास का रकबा महज 80 हजार हेक्टेयर पर सिमटा

25-Jul-2026 12:32 PM

भटिंडा। केन्द्र सरकार का कहना है कि पिछले 6 वर्षों के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कपास की बिजाई, पैदावार एवं उपज दर में भारी गिरावट आई है। इसका कुल उत्पादन क्षेत्र 2020-21 सीजन के 132.85 लाख हेक्टेयर से घटते हुए 2025-26 के सीजन में 114.82 लाख हेक्टेयर रह गया।

इसी तरह समीक्षाधीन अवधि के दौरान रूई का घरेलू उत्पादन 352.48 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) से लुढ़ककर 2025-26 में 290.91 लाख गांठ पर अटक गया जबकि कपास की औसत उपज दर 451 किलो प्रति हेक्टेयर से घटकर 431 किलो प्रति हेक्टेयर पर आ गई। 2022-23 के सीजन में उपज दर 443 किलो प्रति हेक्टेयर पर पहुंची थी। 

जहां तक पंजाब का सवाल है तो वहां कपास का उत्पादन क्षेत्र 2025-26 सीजन के 1.19 लाख हेक्टेयर से घटकर 2026-27 के वर्तमान सीजन में महज 80 हजार हेक्टेयर पर सिमट गया। राज्य सरकार ने 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन वास्तविक रकबा महज इसके 64 प्रतिशत भाग तक ही पहुंच सका।

पंजाब में कपास की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण तेजी से घटता जा रहा है। घरेलू उत्पादन कम होने से रूई का आयात तेजी से बढ़ रहा है। 2024-25 के सीजन में 5,62,224 टन रूई का आयात हुआ था जो 2025-26 में उछलकर 10,13,455 टन पर पहुंच गया।