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29-Oct-2026 05:50 PM
नई दिल्ली। घरेलू उत्पादन घटने की आशंका से रूई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा में कम से कम दो माह की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद लगाई जा रही थी लेकिन सरकार की ओर से अभी तक न तो इस सम्बन्ध में कोई संकेत दिया गया है और न ही निर्णय लिया गया है। रूई के शुल्क मुक्त आयात की समयावधि 31 अक्टूबर तक निर्धारित है। उद्योग इसे 31 दिसम्बर 2026 तक बढ़ाने की मांग कर रहा है।
कपास के बिजाई क्षेत्र में कमी आने तथा महाराष्ट्र एवं कर्नाटक सहित कुछ अन्य राज्यों में सूखा पड़ने से 2026-27 के सीजन में रूई का उत्पादन घटने की संभावना है। दूसरी ओर इसकी मांग एवं खपत में वृद्धि होने के आसार हैं। 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान देश में विशाल मात्रा में रूई का आयात किया गया।
रूई पर पहले 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ था जिसे जून-जुलाई में अस्थायी रूप से वापस ले लिया गया। भारत में रूई का आयात मुख्यतः अमरीका, ब्राजील एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से होता है। चीन के बाद भारत दुनिया में रूई का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है लेकिन फिर भी यहां विदेशों से विशाल मात्रा में इसके आयात की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि घरेलू मांग एवं जरूरत की तुलना में उत्पादन काफी पीछे रह जाता है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि भारत से कई क्षेत्रों को अच्छी मात्रा में रूई का निर्यात भी किया जाता है। यदि इसके शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा नहीं बढ़ाई गई तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्त्र उत्पादों की कीमत गैर प्रतिस्पर्धी होने का खतरा बना रहेगा। रूई का घरेलू बाजार भाव ऊंचा रह सकता है।