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29-Oct-2026 05:01 PM
नई दिल्ली। देश के कुछ राज्यों में रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं की बोआई तो आरंभ हो गई है मगर उसकी रफ्तार काफी धीमी देखी जा रही है क्योंकि एक तो खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी में देरी होने से खेत जल्दी-जल्दी खाली नहीं हो रहे हैं और दूसरी, खेतों की मिटटी में नमी का अभाव भी देखा जा रहा है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि इस वर्ष गत सप्ताह तक गेहूं का उत्पादन क्षेत्र 11 हजार हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 27 हजार हेक्टेयर के आधे से भी कम है। उल्लेखनीय है कि कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के गेहूं का कुल उत्पादन 1207 लाख टन आंका था जो एक नया रिकॉर्ड स्तर है। 2026-27 सीजन के लिए इसके उत्पादन का लक्ष्य और भी बढ़ाकर 1210 लाख टन नियत किया गया है जो सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर है।
मंत्रालय के मुताबिक गेहूं की बिजाई अभी शुरू ही हुई है इसलिए इसके बारे में कोई निश्चित अनुमान लगाना फिलहाल ठीक नहीं है। सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2025-26 सीजन के 2585 रुपए प्रति क्विंटल से 25 रुपए बढ़ाकर 2026-27 सीजन के लिए 2610 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया है जिससे किसानों को इसकी खेती का प्रोत्साहन मिलेगा। केन्द्रीय पूल के लिए इसी समर्थन मूल्य पर गेहूं की विशाल खरीद की जाएगी। गेहूं की बिजाई अक्टूबर-नवम्बर से तथा कटाई-तैयारी मार्च-अप्रैल से आरंभ होती है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025-26 के रबी सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 336 लाख हेक्टेयर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था।