मसूर बाजार में तेजी, महंगा आयात और सीमित उपलब्धता से भाव को समर्थन

09-Sep-2026 07:04 PM

आयातित मसूर की पड़ताल महंगी होने तथा उत्पादक मंडियों में उपलब्धता लगातार सीमित बने रहने से मसूर की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है। बाजार में मौजूदा तेजी का प्रमुख आधार आयातित मसूर की बढ़ती लागत है। डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी और कनाडा में मसूर के भाव बढ़ने से आयातकों की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके चलते आयातित मसूर घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धी भाव पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है और आयातकों की बिकवाली भी सीमित बनी हुई है। इसका सीधा लाभ घरेलू मसूर की कीमतों को मिल रहा है।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की प्रमुख उत्पादक मंडियों में मसूर का स्टॉक लगातार घट रहा है। किसानों के पास पुराना माल सीमित मात्रा में बचा है, जबकि नई फसल की आवक में अभी समय है। उत्पादन में लगातार गिरावट के कारण उपलब्धता पहले से ही कमजोर बनी हुई है। ऐसे में उत्पादक मंडियों से आवक घटने के साथ-साथ प्रमुख वितरण केंद्रों पर भी मसूर की उपलब्धता कम होती जा रही है।

इसके अलावा, आगामी फसल की बुवाई को लेकर भी चिंता बनी हुई है। बारिश की कमी के कारण नई फसल की बुवाई प्रभावित होने की आशंका है। यदि मौसम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में इसका असर फसल के रकबे, उत्पादन और उपलब्धता पर पड़ सकता है। हालांकि, बुवाई और मौसम की स्थिति आगे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आगे त्योहारी सीजन को देखते हुए दाल मिलर्स की चालानी मांग में सुधार की उम्मीद है। खपत बढ़ने पर मिलर्स की खरीदारी में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। यदि मांग में सुधार के साथ उत्पादक मंडियों की आवक और कमजोर होती है, तो मसूर की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना रहेगी।

कुल मिलाकर, मसूर बाजार का रुख फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है। महंगा आयात, सीमित घरेलू उपलब्धता और घटता पुराना स्टॉक बाजार को सहारा दे रहे हैं।