मानसून की वर्षा एवं बांधों के जलस्तर पर सरकार की गहरी नजर

09-Jul-2026 07:13 PM

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति, बांधों-जलाशयों में पानी के स्टॉक, हिन्द महासागर से सकारात्मक डायपोल (आईओडी) तथा बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर में होने वाली हलचल के साथ-साथ खरीफ फसलों की बिजाई पर भी सरकार की गहरी नजर है। दरअसल अब कुछ ऐसे सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं जो मानसूनी बारिश पानी के संकट तथा सूखे की समस्या के प्रति बढ़ती चिंता को घटाने वाले हैं। 

बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दाब का एक क्षेत्र बनने की संभावना है जो मानसून को गतिमान एवं क्रियाशील बनाए  रखने में सहायक साबित हो सकता है। समुद्र का वातावरण भी मानसून के लिए अनुकूल होता जा रहा है इसलिए अनावश्यक चिंता की कोई वजह नहीं है।

हालांकि मानसून की वर्षा पट्टी अगले कुछ दिनों में देश के मध्यवर्ती एवं पश्चिमी  भाग से निकलकर अन्य क्षेत्रों में शिफ्ट हो सकती है मगर बारिश का सिलसिला देश के किसी न किसी भाग में कायम रहने की उम्मीद है। वैसे भी पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों तथा दक्षिणी प्रायद्वीप में मानसून की वर्षा अभी सामान्य औसत से काफी पीछे चल रही है जबकि पश्चिमोत्तर भारत में भी यह सामान्य स्तर पर नहीं पहुंच पाई है। इन क्षेत्रों में वर्षा की जरूरत बनी हुई है।

जहां तक बांधों- जलाशयों में पानी के स्टॉक का सवाल है तो यह फिलहाल सामान्य स्तर के आसपास ही है। वर्षा का  असमान वितरण होने से कहीं-कहीं जल स्तर नीचे आया है। आगे इसकी भरपाई हो सकती है। केन्द्रीय जल आयोग देश के जिन 166 प्रमुख बांधों-जलाशयों की निगरानी (मॉनिटरिंग) करता है उसमें 2 जुलाई 2026 को 47.72 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक मौजूद था जो इस अवधि के लिए नियत सामान्य औसत भंडार 48.40 बीसीएम के अत्यन्त निकट है। यह अलग बात है कि मौजूदा पानी का स्टॉक गत वर्ष की समान अवधि के भंडार 78.07 बीसीएम से काफी नीचे है। अब इसमें क्रमिक रूप से बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।