मोजाम्बिक से आयात अटकने के कारण तुवर का भाव तेज होने के संकेत

25-Jan-2024 05:14 PM

गुलबर्गा । अफ्रीका महाद्वीप में अरहर के सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- मोजाम्बिक से भारत में विशाल मात्रा में इस महत्वपूर्ण दलहन (तुवर) का आयात होता रहा है मगर इस बार दो कंपनियों में मचे घमासान एवं अदालती हस्तक्षेप के कारण वहां से इसका शिपमेंट प्रभावित होने लगा।

इसके फलस्वरूप घरेलू बाजार में तुवर का भाव ऊंचा एवं तेज होता जा रहा है। हालांकि भारत में तुवर की नई फसल मंडियों में आ रही है तथा म्यांमार से इसका आयात भी बढ़ने के आसार हैं लेकिन फिर भी घरेलू बाजार में कीमतों का स्तर ऊंचा रहने की संभावना है। इससे आम उपभोक्ताओं को कठिनाई हो सकती है। 

जिंस कारोबार में संलग्न दो कंपनियों- एक्सपोर्ट ट्रेडिंग ग्रुप (ईटीजी) तथा रॉयल ग्रुप के बीच उत्पन्न विवाद के कारण हाल के महीनों में मोजाम्बिक से तुवर के निर्यात में बाधा पड़ी है।

इसका सिलसिला अभी जारी है। अफ्रीका से भारत में निर्यात होने वाले तुवर की कुल मात्रा में अकेले मोजाम्बिक का योगदान 40 प्रतिशत के करीब रहता है जबकि भारत स्वयं दुनिया में अरहर का सबसे प्रमुख उत्पादक तथा खपतकर्ता देश है।

जब यह लगने लगा कि मोजाम्बिक से भारत को तुवर के निर्यात का रास्ता साफ हो गया है तभी एक अदालत ने इसके शिपमेंट पर रोक लगाने का फैसला सुना दिया।

दरअसल रॉयल ग्रुप को ईटीजी के गोदामों से हजारों टन तुवर सहित अन्य कृषि उत्पादों को जब्त करके विदेशों में उसका निर्यात करने का अधिकार एक न्यायालय ने दिया जिसका कुल मूल्य 6.10 करोड़ डॉलर बताया जा रहा है लेकिन ईटीजी ने दूसरी अदालत से इस पर स्थगन आदेश हासिल कर लिया।

उसने अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा कि उसके गोदामों से कृषि उत्पादों के स्टॉक को गैर कानूनी रूप से जब्त किया गया है इसलिए इसके निर्यात पर रोक लगाई जाए। ईटीजी ने दिसम्बर में मोजाम्बिक के राष्ट्रपति से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। 

नामपुला प्रान्त की एक अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ईटीजी ग्रुप के गोदामों से जब्त किए गए तुवर, सोयाबीन, तिल, मूंगफली, चावल तथा मक्का के स्टॉक की निकासी तथा बल्क एवं कंटेनरों में उसके कार्गो के निर्यात शिपमेंट को स्थगित रखा जाए।

इससे पूर्व नवम्बर 2023 में भारत को भेजी जाने वाली 1.50 लाख टन तुवर की खेप को मोजाम्बिक के बंदरगाह पर रोक दिया गया था।

कस्टम विभाग से इसके शिपमेंट के लिए अनुमति नहीं मिल रही थी। इसके फलस्वरूप  भारत में तुवर का भाव तेज हो गया। दिसम्बर में भी कीमतों में तेजी रही। जनवरी के प्रथम सप्ताह में तुवर का दाम घटकर नीचे आया मगर तीसरे सप्ताह से पुनः तेज होने लगा।