मई जुलाई में अल नीनो के आने के 61 प्रतिशत चांस

29-Apr-2026 08:36 PM

तिरुअनन्तपुरम। अमरीका के जलवायु पूर्वानुमान केन्द्र ने कहा है कि विषुवतीय प्रशांत महासागर से समुद्री तल पर अल नीनो के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होने के संकेत मिल रहे हैं और मौसम तथा तापमान से सम्बन्धित कई मॉडल्स के अवलोकन से पता चलता है कि इसका आगमन अगले महीनों के दौरान हो सकता है।

जलवायु केन्द्र के अनुसार न्यूट्रल अल नीनो सॉदर्न ऑसिलेशन की स्थिति फिलहाल ट्रॉपिकल प्रशांत महासगार के ऊपर बनी हुई है जबकि अल नीनो सॉदर्न ऑसिलेशन के अलर्ट सिस्टम पर गहरी नजर रखी जा रही है। जलवायु केन्द्र ने कहा है कि मई से जुलाई 2026 के दौरान अल नीनो के आने के फिलहाल 61 प्रतिशत आसार हैं जबकि समुद्र की गतिविधियों में हो रहे बदलाव पर निरन्तर गहरी नजर रखी जा रही है। 

यह भी कहा जा रहा है कि अप्रैल से जून तक न्यूट्रल स्थिति कायम रह सकती है। इसका मतलब यह हुआ कि इन महीनों में या तो अल नीनो नहीं आयेगा और यदि आता भी है तो उसकी तीव्रता बहुत कम रहेगी। इस अवधि में अल नीनो के उत्पन्न एवं सक्रिय होने की केवल 20 प्रतिशत संभावना व्यक्त की गई है। इससे प्रतीत होता है कि जून के अंतिम दिनों से अल नीनो मौसम चक्र की गतिशीलता बढ़ सकती है। वर्तमान समय में पूर्वी-मध्यवर्ती प्रशांत महासगार में समुद्र की सतह का तापमान औसत स्तर से कुछ ही ऊपर देखा जा रहा है। 

ऐसा प्रतीत होता है कि अल नीनो का प्रभाव जुलाई-अगस्त में बढ़ना शुरू हो सकता है जो भारत में मानसूनी बारिश का पीक समय होता है। इन्हीं दो महीनों में देश के अंदर सबसे ज्यादा वर्षा एवं खरीफ फसलों की सर्वाधिक बिजाई होती है।  अगस्त में अल नीनो की स्थिति काफी मजबूत रहने की आशंका है जिससे खासकर दलहन, तिलहन एवं कपास तथा गन्ना की फसल को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में धान तथा मोटे अनाजों की फसल प्रभावित हो सकती है।