खाद्य तेलों के आयात खर्च में 20 प्रतिशत की भारी वृद्धि
23-Jul-2026 11:49 AM
मुम्बई। वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर- 2025- अक्टूबर 2026) के शुरुआती आठ महीनों में खाद्य तेलों के आयात पर होने वाले खर्च में 20 प्रतिशत की भारी बढ़ोत्तरी को देखते हुए एक अग्रणी उद्योग संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने पूरे मार्केटिंग सीजन का आयात खर्च तेजी से उछलकर 1.75 लाख करोड़ रुपए के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है।
एसोसिएशन के अनुसार खाद्य तेलों के आयात में नियमित रूप से वृद्धि हो रही है और वैश्विक बाजार भाव भी ऊंचा चल रहा है। इसके अलावा डॉलर के सापेक्ष भारतीय मुद्रा की विनिमय दर अत्यन्त कमजोर (नीचे) बनी हुई है जिससे 'रुपए' में आयात खर्च और भी ऊंचा हो गया है। हालात खराब होते जा रहे हैं जिसे नजरअंदाज करना कठिन है।
2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान खाद्य तेलों के आयात का खर्च बढ़कर 1.61 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचा था जबकि 2025-26 सीजन का कुल खर्च और भी बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपए के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाने की संभावना है। चालू मार्केटिंग सीजन के शुरुआती आठ महीनों में यानी नवम्बर 2025 से जून 2026 के दौरान देश में खाद्य तेलों का आयात 104 लाख टन से अधिक हुआ जिससे इस पर होने वाला खर्च भी 99,000 करोड़ रुपए से करीब 20,000 करोड़ रुपए बढ़कर 1,19,000 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि यह महज आंकड़ा नहीं है बल्कि यह भी दर्शाता है कि देश से विशाल मात्रा में बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बाहर जा रही है जो गंभीर चिंता की बात है। यदि इस पर अंकुश लग जाए और इस राशि का उपयोग घरेलू प्रभाग में तिलहन-तेल का उत्पादन बढ़ाने में किया जाए तो आयात पर निर्भरता में भारी कमी आ सकती है।
