खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने में सफल होना पड़ेगा प्रहलाद जोशी को
11-Jun-2024 08:05 PM
नई दिल्ली । पिछली सरकार में कोयला और संसदीय कार्य मंत्री के रूप में काम करने वाले पांच बार के भाजपा सांसद प्रहलाद जोशी को इस बार खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नई एवं नवीनीकृत ऊर्जा मंत्रालय का दायित्व भी सौंपा गया है। पिछले अनेक महीनों से देश में खाद्य महंगाई का ग्राफ काफी ऊंचा चल रहा है।
कुछ लोगों का कहना है कि भाजपा को बहुतम से कम सीट मिलने का एक कारण खाद्य महंगाई भी है। दरअसल सिर्फ चावल, गेहूं (आटा) एवं मोटे अनाजों का दाम ही ऊंचा नहीं चल रहा है बल्कि दाल-दलहन, तेल-तिलहन एवं चीनी सहित तमाम खाद्य उत्पादों और यहां तक की मसालों के भाव भी तेजी की गिरफ्त में हैं।
यह सही है कि खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय की ओर से खाद्य महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए जिसमें सफेद चावल, गेहूं एवं इसके उत्पाद तथा चीनी आदि के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना, दाल-दलहन की आपूर्ति बढ़ाने हेतु इसे आयात शुल्क के दायरे से बाहर करना तथा खाद्य तेलों पर न्यूनतम स्तर का आयात शुल्क लगाने का उपाय भी शामिल है लेकिन इसका अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ सका। घरेलू प्रभाग में खाद्य महंगाई काफी ऊंचे स्तर पर बरकरार है।
नए खाद्य मंत्री को खाद्यान्न वितरण से सम्बन्धित स्कीम को राज्यों के साथ मिलकर सकल बनाने का प्रयास करना होगा। इसके आलावा खाद्य सब्सिडी का प्रबंधन करना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
प्रधानमंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि मुफ्त राशन वितरण योजना अगले पांच साल तक जारी रहेगी। इसके लिए खाद्य मंत्री को हमेशा केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न (चावल और गेहूं) का पर्याप्त स्टॉक रखना पड़ेगा।
दालों और खाद्य तेलों की ऊंची कीमतों को नीचे लाने के लिए नई रणनीति बनाने की आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि एक तरफ इसका उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत से कम हो रहा है तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री विदेशों से इसके आयात पर निर्भरता घटाने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। आगामी समय काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।
