भारतीय मिलर्स द्वारा अब तक 6 लाख टन चीनी का निर्यात अनुबंध

07-Apr-2026 10:43 AM

नई दिल्ली। अमरीकी डॉलर की तुलना में रुपए का भारी अवमूल्यन होने तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव में तेजी आने से भारतीय मिलर्स को चीनी का निर्यात अनुबंध करने में अच्छी सफलता मिल रही है।

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के मुताबिक चालू मार्केटिंग सीजन में अभी तक भारतीय मिलर्स द्वारा 6 लाख टन चीनी का निर्यात सौदा किया गया है और उसमें से करीब 4 लाख टन का शिपमेंट भी हो चुका है। मार्च में निर्यात अनुबंध तथा शिपमेंट की गति अच्छी रही और मिलर्स के 'पड़ते' में सुधार आया। आयातकों के लिए भारतीय चीनी आकर्षक हो गई। 

एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार यदि ऐसी ही गति आगे भी बरकरार रही तो चालू मार्केटिंग सीजन के अंत या सितम्बर 2026 तथा भारत से चीनी का कुल निर्यात 12 लाख टन के आसपास पहुंच सकता है।

पश्चिम एशिया से चीनी रिफाइनर्स को अभी ईरान-अमरीका युद्ध के कारण आयात में कठिनाई हो रही है और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से रिफाइंड चीनी की वैश्विक आपूर्ति में बाधा पड़ रही है। युद्ध की समाप्ति के बाद बाजार में चहल-पहल और तेजी बढ़ सकती है। 

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए सरकार अब तक 15.80 लाख टन चीनी के निर्यात की वास्तविक अनुमति दे चुकी है जिसमें से 3.73 लाख टन का शिपमेंट पहले ही हो चुका है।

अरब प्रायद्वीप वैश्विक चीनी व्यापार का प्रवेश द्वार माना जाता है और वहां होर्मुज स्ट्रेट के जल मार्ग से संसार की 10 प्रतिशत से अधिक कच्ची चीनी (रॉ शुगर) मंगाई जाती है। इसी मार्ग से दुनिया की 5 प्रतिशत रिफाइंड चीनी का निर्यात भी होता है।