कमजोर उत्पादन के बावजूद ईसबगोल का भाव नरम
08-Jun-2026 05:52 PM
नई दिल्ली। भारतीय किसानों द्वारा 2025-26 के रबी सीजन में ईसबगोल की खेती अपेक्षाकृत कम क्षेत्रफल में की गई और मौसम की स्थिति पूरी तरह अनुकूल नहीं होने से इसकी उपज दर में भी कमी आ गई। भारतीय ऑर्गनिक क्षेत्र के लिए नए नियमों- शर्तों के कारण वैश्विक बाजार में ईसबगोल (साईलियम) का निर्यात प्रभावित हो रहा है।
हैरानी की बात है कि उत्पादन में गिरावट आने के बावजूद ईसबगोल का भाव नरम पड़ गया है। हालांकि प्रतिकूल मौसम तथा छोटे बिजाई क्षेत्र के कारण वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान ईसबगोल एवं इसकी भूसी के दाम में कुछ तेजी आई थी। भारी बेमौसमी वर्षा एवं आंधी-तूफान के कारण इसके उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट आने का अनुमान है लेकिन पिछला बकाया स्टॉक ऊंचा होने के कारण बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम बनी हुई है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार मूंदड़ा बंदरगाह पर जून 2025 में ईसबगोल भूसी (99 प्रतिशत) का फ्री ऑन बोर्ड निर्यात ऑफर मूल्य औसतन 8720 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहा था जो दिसम्बर 2025 तक आते-आते घटकर 7750 डॉलर प्रति टन के करीब रह गया। ध्यान देने की बात है कि जून 2024 में ईसबगोल भूसी (99%) का निर्यात ऑफर मूल्य उछलकर 10,200 डॉलर प्रति टन की ऊंचाई पर पहुंच गया था और दिसम्बर 2024 में भी यह 9400 डॉलर प्रति टन के ऊंचे स्तर पर कायम था।
मार्च 2026 में ईसबगोल के घरेलू उत्पादन में 20 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया गया था लेकिन उसके बाद मौसम खराब होने से उत्पादन में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त कमी आने की संभावना व्यक्त की जाने लगी। इससे ईसबगोल भूसी का निर्यात ऑफर मूल्य मार्च में बढ़कर 8150 डॉलर प्रति टन पर पहुंचा मगर मांग मजबूत नहीं होने के कारण मई 2026 में यह घटकर 7850 डॉलर प्रति टन पर आ गया।
वर्तमान समय में फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य ईसबगोल भूसी 99 प्रतिशत का 7850 डॉलर प्रति टन, 98 प्रतिशत का 6000 डॉलर तथा 95 प्रतिशत का 5090 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है। इसी तरह ईसबगोल भूसी पाउडर का निर्यात ऑफर मूल्य 99 प्रतिशत क्वालिटी का 6520 डॉलर, 98 प्रतिशत का 5550 डॉलर प्रति टन और 95 प्रतिशत का 4410 डॉलर प्रति टन चल रहा है।
सरकारी एजेंसी- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के लिए एक नया नियम लागू किया गया है जिससे इसकी डिलीवरी में देर हो सकती है और ऑर्गेनिक ईसबगोल भूसी का अभाव पैदा हो सकता है।
पूर्व प्रचलित नियम के विपरीत अब केवल उत्पादक समूह को ही नहीं बल्कि छोटे-बड़े सभी किसानों को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक है। इस रजिस्ट्रेशन की समय सीमा तो बढ़ा दी गई है मगर इस नियम से छोटे-छोटे उत्पादक काफी परेशान हैं और वे सही ढंग से माल की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।
