कम तथा असमान वर्षा से दलहन-तिलहन की खेती पर ख़तरा

22-Jun-2026 12:38 PM

नई दिल्ली। अल नीनों के दुष्प्रभाव से इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर रहने की सम्भावना है जिससे जून-सितम्बर के चार महीनों की अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर न केवल बारिश कम होगी बल्कि इसका वितरण भी असमान रह सकता है। इससे खासकर खरीफ कालीन दलहन-तिलहन फसलों की बिजाई एवं औसत उपज दर प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि ऊंचे बाजार भाव के कारण चालू खरीफ सीजन में भारतीय किसान सोयाबीन, मूंगफली, तिल, सूरजमुखी एवं अरंडी जैसी महत्वपूर्ण तिलहन फसलों का क्षेत्रफल बढाने के मूड में हैं लेकिन इसके लिए उन्हें मानसूनी वर्षा का पर्याप्त मजबूत सहारा मिलने में संदेह हैं।

दलहन फसलों के संवर्ग में खरीफ सीजन के दौरान मुख्यतः अरहर (तुवर), उड़द एवं मूंग की खेती होती है जबकि मोठ, कुल्थी एवं खेसारी जैसे दलहनों की बिजाई भी सीमित क्षेत्रफल में की जाती है। दलहन-तिलहन फसलों का रकबा अभी गत वर्ष से पीछे चक रहा है क्योंकि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात एवं तेलंगाना सहित अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसूनी वर्षा का अभाव बना हुआ है।

मौसम विभाग ने आगामी दिनों के दौरान देश के अनेक राज्यों में मानसून की सक्रियता बढ़ने तथा अच्छी बारिश होने की सम्भावना व्यक्त की है जिससे अन्य फसलों के साथ दलहन-तिलहन की बिजाई की रफ़्तार भी बढ़ने की उम्मीद है। बिजाई में कुछ देर अवश्य हो रही है लेकिन अगर आगे अच्छी वर्षा हुई तो क्षेत्रफल में गिरावट का अंतर काफी हद तक कम हो सकता है।

केंद्र सरकार ने इस बार भी तुवर, उडाद, सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी एवं तिल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोत्तरी कर दी है जिससे किसानों को इसका रकबा एवं उत्पादन बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल सकत है। लेकिन इसके लिए मानसून का अनुकूल रहना आवश्यक है।