होर्मुज़ के बंद होने से बासमती चावल का निर्यात हो सकता है प्रभावित
22-Jun-2026 01:48 PM
नई दिल्ली। लेबनान पर इजरायल का हमला जारी रहने के विरोध में ईरान ने एक बार फिर होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा की है जिस इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से व्यावसायिक जहाजों का आवागमन अवरुद्ध हो गया है इसके फलस्वरूप भारत से बासमती चावल और चाय के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। निर्यातकों का कहना है कि पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में निर्यात घटने या अटकने पर बासमती चावल के दाम में 5 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
ईरान, अमरीका के बीच अंतरिम शांति समझौता होने के बाद जब होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर सहमती बनी थी तब भारतीय निर्यातकों ने राहत की सांस ली थी और ऐसा लगने लगा कि अब हालात सामान्य हो जायेंगे और भारत से निर्यात होने की उम्मीद से घरेलू प्रभाग में बासमती चावल की भारी खरीदारी आरम्भ कर दी जिससे इसके दाम में 15-20 प्रतिशत तक का इजाफा हो गया। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन का कहना है कि ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरू मध्य को अचानक बंद करने का निर्णय लिए जाने से बासमती चावल का भाव नरम पड़ जाएगा।
समझा जाता है कि पश्चिम एशिया के देशों के लिए हाल में करीब 60 हजार टन बासमती चावल की खेप भेजी गयी थी जो अभी रास्ते में ही है। होर्मुज़ के बंद होने से इस का भविष्य अनिश्चित हो गया है। पश्चिम एशिया में भारतीय बासमती चावल के पांच शीर्ष खरीदार देशों में सऊदी अरब, ईरान, ईराक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तथा यमन शामिल है। भारत से बासमती केवल के कुल वार्षिक निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत भाग इन देशों में ही भेजा जाता है। इसके अलावा वहां क़तर, जॉर्डन, कुवैत एवं बहरीन जैसे देश भी इसका आयात करते हैं।
भारत में 72 लाख टन से अधिक बासमती चावल का सालाना घरेलू उत्पादन होता है जिसमें से लगभग 60 लाख टन का निर्यात दुनिया के विभिन्न देशों को कर दिया जाता है।
