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19-Oct-2026 05:05 PM
नई दिल्ली। मौसम एवं वर्षा से सम्बन्धित जो आंकड़े सामने आ रहे हैं उससे संकेत मिलता है कि आगामी समय में अल नीनो की तीव्रता एवं ताकत बढ़ने से रबी फसलों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों को पहले ही काफी नुकसान हो चुका है और अब रबी फसलों के लिए भी परिदृश्य उत्साहवर्धक दिखाई नहीं पड़ रहा है।
लेकिन एक खास बात यह है कि रबी फसलों की बिजाई एवं प्रगति शीतकाल में होती है और ये फसलें खेतों की मिटटी में बचे नमी के अवशेष, कृत्रिम सिंचाई तथा शीतकालीन वर्षा पर आश्रित रहती है। इसके विपरीत खरीफ कालीन फसलों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ता है और मानसूनी बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है।
अल नीनो की तीव्रता एवं दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर वर्षा से खासकर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में खरीफ फसलों को काफी नुकसान होने की सूचना मिल रही है जबकि रबी फसलों पर अल नीनो का कुछ ज्यादा गंभीर असर पड़ सकता है।
मानसून की कम बारिश से खेत सूखे हुए हैं जिससे रबी फसलों की बिजाई में बाधा पड़ेगी। देर से बिजाई होने पर फसलों की उपज दर प्रभावित हो सकती है।
उत्तरी भारत में हालत कुछ हद तक बेहतर है और इसलिए पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में भी मानसून की बारिश लगभग सामान्य होने एवं बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर ऊंचा होने से रबी फसलों की बिजाई में ज्यादा कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
अब दक्षिण भारत में भी उत्तर -पूर्व मानसून की अच्छी बारिश होने लगी है। दक्षिण भारत में गेहूं, जौ, मसूर, मटर एवं सरसों का उत्पादन नहीं या नगण्य होता है मगर चना सहित अन्य फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है।