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19-Oct-2026 04:02 PM
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास विशालकाय स्टॉक मौजूद रहने और खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत इसकी ई-नीलामी शुरू होने के बावजूद गेहूं की कीमतों में निकट भविष्य में तेजी-मजबूती का माहौल बरकरार रहने की संभावना है। इसके कुछ ठोस कारण है। प्रमुख उत्पादक राज्यों की थोक मंडियों में गेहूं की आपूर्ति नियमित रूप से घटती जा रही है।
किसानों एवं व्यापारियों के पास इसका सीमित स्टॉक बचा हुआ है। त्यौहारी सीजन में अक्सर आटा, मैदा एवं सूजी जैसे मूल्य संवर्धित गेहूं उत्पादों की मांग तथा खपत बढ़ जाती है जिससे फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स को अधिक मात्रा में गेहूं की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा खाद्य निगम के गेहूं का न्यूनतम आरक्षित मूल्य इस बार ऊंचे स्तर पर निर्धारित हुआ है और उस पर परिवहन खर्च अलग से लगता है।
सरकार गेहूं के नियंत्रण मुक्त निर्यात की स्वीकृति पहले ही दे चुकी है और देश से इसका शिपमेंट भी हो रहा है। लेकिन निर्यात प्रदर्शन इतना उत्साहवर्धक नहीं है कि उसका घरेलू बाजार भाव पर मनोवैज्ञानिक असर पड़े। पिछले सप्ताह दिल्ली में गेहूं का भाव बढ़कर 3000 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गया। कुछ अन्य महत्वपूर्ण मंडियों में भी गेहूं के दाम में अच्छी वृद्धि हुई। उधर सरकारी गेहूं की खरीद में पंजाब, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मिलर्स / प्रोसेसर्स द्वारा भारी दिलचस्पी दिखाई गई। अन्य प्रांतों में भी इसकी अच्छी खरीद बिक्री हुई।
रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं की बिजाई का सीजन आरंभ हो गया है लेकिन इसका रकबा गत वर्ष से कुछ पीछे रह सकता है क्योंकि सरकार ने इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य में मात्र 25 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया है जिससे किसान ज्यादा खुश नहीं हैं।