ईंधन एवं उर्वरक संकट से एशिया में चावल उत्पादन पर ख़तरा
13-Apr-2026 04:45 PM
बैंकॉक। एशिया के विभिन्न उत्पादक देशों में धान की फसल की कटाई-तैयारी या तो समाप्त हो चुकी है या बिल्कुल अंतिम चरम में पहुंच गयी है। खेत अभी खाली है और किसान अगली फसल के प्रति आश्वस्त नहीं है। भारत में जून-जुलाई में धान की रोपाई शुरू होने वाली है। उधर थाईलैंड, वियतनाम, कम्बोडिया, म्यांमार तथा इंडोनेशिया सहित अन्य उत्पादक देशों के किसान ईंधन तथा ऊर्वरक की भारी कमी को देखते हुए यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आगे धान की खेती की जाए या इसके बदले अन्य फसलों को प्राथमिकता दी जाए।
मध्य पूर्व एशिया में संकट पुनः गहराने लगा है। ईरान अमरीका के बीच हुई शान्ति वार्ता विफल हो गयी और होर्मुज़ स्ट्रेट पर दावे-प्रतिदावे का दौर शुरू हो गया है। वहां स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है। क्रूड खनिज तेल का भाव ऊंचा होने लगा है। उर्वरकों के आयात-निर्यात में बाधा पड़ रही है और इसका शिपमेंट खर्च काफी ऊंचा हो गया है। इससे किसानों की दुविधा बढ़ती जा रही है।
दक्षिण एशिया एवं दक्षिण पूर्व रशिया (चीन सहित) में धान-चावल का सर्वाधिक उत्पादन होता है। इस क्षेत्र के छोटे-छोटे लाखों किसानों को उचित मूल्य पर कृषि साधन (इनपुट) प्राप्त करने में सफलता नहीं मिल रही है। ट्रैक्टर, सिंचाई पम्प तथा राइस प्लांटर्स चलाने के लिए डीजल नहीं मिल रहा है। थाईलैंड में तो अनेक किसानों ने धान की फसल को खेतों में ही छोड़ दिया क्योंकि इसकी कटाई-तैयारी का खर्च काफी ऊंचा बैठ रहा है।
संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है और होर्मुज़ स्ट्रेट को भी खोला नहीं गया है। अस्थाई युद्धविराम जरुर लागू है लेकिन संघर्ष की आग कभी भी भड़क सकती है। भारतीय किसान भी चिंतित हैं।
