हरियाणा में सरकारी क्रय केन्द्रों पर सरसों की आवक बहुत कम

31-Mar-2026 03:52 PM

हिसार। यद्यपि हरियाणा की खुली थोक मंडियों में सरसों का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कुछ नीचे आ गया है लेकिन फिर भी किसान सरकारी एजेंसियों के बजाए व्यापारियों / स्टॉकिस्टों को अपना उत्पाद बेचने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। प्राइवेट खरीदार सरसों की कीमत का तत्काल भुगतान कर देते हैं। किसानों की शिकायत है कि सरकारी क्रय केन्द्रों पर अच्छी व्यवस्था नहीं है और कुछ तकनीकी खामियां भी देखी जा रही है।  

उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने 2025-26 के रबी सीजन हेतु सरसों का एमएसपी 6200 रुपए प्रति क्विंटल नियत कर रखा है जबकि हरियाणा की विभिन्न मंडियों में सामान्य औसत क्वालिटी वाली सरसों का भाव 5300 से 5800 रुपए प्रति क्विंटल के बीच आ गया है।

राज्य में 28 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद औपचारिक तौर पर शुरू हुई लेकिन किसान अपने माल की बिक्री में व्यापारियों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकारी क्रय केन्द्रों पर बहुत कम माल आ रहा है। 

इस स्थिति को देखते हुए विपक्ष को राज्य सरकार पर हमला करने का मौका मिल रहा है। उसने आरोप लगाया है कि सरकार की खरीद योजना बहुत कमजोर है और क्रय केन्द्रों पर न तो खरीद की पक्की व्यवस्था की गई है और न ही किसानों को सही समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का पुख्ता प्रबंध किया गया है। कल यानी 1 अप्रैल 2026 से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने वाली है। 

हरियाणा में इस वर्ष करीब 13 लाख टन सरसों की खरीद का लक्ष्य नियत किया गया है जिसमें से 25 प्रतिशत की खरीद केन्द्रीय एजेंसियों तथा शेष 75 प्रतिशत की खरीद प्रांतीय एजेंसियों द्वारा की जानी है लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए लक्ष्य की प्राप्त मुश्किल लगती है।