ग्रीष्मकालीन फसलों की बेहतर बिजाई से पैदावार सुधरने के आसार
20-Feb-2026 07:23 PM
नई दिल्ली। हालांकि पिछले साल की तुलना में मौजूदा जायद सीजन (ग्रीष्मकालीन) की फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र आगे चल रहा है जिसमें मूंगफली एवं मक्का का विशेष योगदान है धान का रकबा पीछे हो गया है। दलहनों की बिजाई कुछ बढ़ी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार गत सप्ताह तक राष्ट्रीय स्तर पर जायद फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 15.18 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 14.75 लाख हेक्टेयर से 43 हजार हेक्टेयर या 3 प्रतिशत ज्यादा है। ग्रीष्मकालीन फसलों की बिजाई में अच्छी प्रगति हो रही है। बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक गत वर्ष से 10 प्रतिशत ज्यादा है। इससे फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा। रबी फसलों की बिजाई के बाद जायद फसलों की खेती शुरू होती है और खरीफ फसलों की बिजाई आरंभ होने से पहले इसकी कटाई-तैयारी होने लगती है।
पहले ग्रीष्मकालीन धान के उत्पादन क्षेत्र को खरीफ तथा रबी सीजन वाले रकबे में ही शामिल माना जाता था लेकिन अब अलग से इसकी गणना की जाती है। जायद सीजन की फसलों का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल इस बार 75.37 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि 2024-25 के सीजन में इसका सकल उत्पादन क्षेत्र तेजी से बढ़कर 83.92 लाख हेक्टेयर के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था।
इस बार खासकर दलहन (मूंग-उड़द) एवं तिलहन (मूंगफली एवं तिल) के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा मक्का का क्षेत्रफल भी बढ़ने की उम्मीद है। 13 फरवरी 2026 तक 6000 हेक्टेयर में बाजरा की बिजाई हुई जबकि गत वर्ष की इस अवधि में इसकी खेती आरंभ भी नहीं हुई थी।
