एथनॉल उत्पादकों द्वारा मक्का को प्रमुखता देने से पंजाब के चावल मिलर्स परेशान
26-Feb-2026 01:54 PM
चंडीगढ़। पंजाब में राइस मिलर्स के पास 100 प्रतिशत टूटे चावल कर विशाल स्टॉक मौजूद है और एथनॉल निर्माताओं द्वारा इसकी खरीद किए जाने की संभावना थी। लेकिन एथनॉल निर्माता अब चावल के बजाए मक्का की खरीद को प्रमुखता दे रहे हैं जिससे राइस मिलर्स की चिंता और परेशानी बढ़ती जा रही है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने एथनॉल निर्माताओं के लिए चावल का दाम 2370 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित कर रखा है जबकि मक्का का भाव महज 1700-1800 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। इससे एथनॉल निर्माता का रुझान मक्का की तरफ होना स्वाभाविक ही है। इसके अलावा सरकार ने मक्का से निर्मित एथनॉल की बिक्री का मूल्य भी ऊंचा रखा है।
ध्यान देने की बात है कि एथनॉल उद्योग पिछले कुछ वर्षों से 100 प्रतिशत टूटे चावल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है लेकिन अब उसमें मक्का का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है। एथनॉल उद्योग को तो पाला बदलने का सस्ता और बेहतर विकल्प मिल गया है
लेकिन चावल उद्योग की कठिनाई बढ़ गई है। खुले बाजार में 100 प्रतिशत टूटे चावल का भाव 1900-2000 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। इसके फलस्वरूप केन्द्रीय पूल से भी एथनॉल उद्योग द्वारा काफी कम मात्रा में चावल का उठाव किया जा रहा है।
पंजाब राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन के उपाध्यक्ष का कहना है कि सरकार को 100 प्रतिशत टूटे चावल का बिक्री मूल्य घटाकर 1900 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित करना चाहिए और केन्द्रीय पूल का जो टूटा चावल मिल परिसर में मौजूद है
उसकी खरीद की अनुमति राइस मिलर्स को देनी चाहिए। कस्टम मिलिंग के दौरान 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत एवं 25 प्रतिशत के साथ 100 प्रतिशत टूटे चावल का भी निर्माण होता है जिसे खाद्य निगम एथनॉल निर्माताओं को एक निश्चित मूल्य पर बेचता है।
