चावल का निर्यात तेजी से बढ़ने पर संदेह कायम

14-Apr-2026 06:00 PM

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालात अब भी अस्थिर एवं अनिश्चित बने हुए हैं। बेशक ईरान और अमरीका के बीच दो सप्ताह के लिए युद्ध विराम (सीजफायर) हुआ है और एक चरण की शांतिवार्ता भी सम्पन्न हो चुकी है लेकिन परिस्थिति में बदलाव या सुधार आने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर अमरीका और ईरान के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है जिससे तमाम देश चिंतित हैं। 

सीजफायर की घोषणा एवं शांतिवार्ता आरंभ होने से भारतीय निर्यातकों को खासकर बासमती चावल के निर्यात शिपमेंट की गति तेज होने की उम्मीद थी। भारतीय बंदरगाहों पर चावल का भारी-भरकम स्टॉक पड़ा हुआ है और इसकी कुछ खेप समंदर में भी अटकी हुई है। नया शिपमेंट शुरू होने वाला था लेकिन अब इसमें समस्या आ सकती है। होर्मुज स्ट्रेट के जल मार्ग से सीमित संख्या में जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही है। 

भारत से लगभग 70 प्रतिशत बासमती चावल का निर्यात पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में होता है। वहां ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इराक, बहरीन, कतर, कुवैत जॉर्डन एवं ओमान जैसे देश भारत से भारी मात्रा में बासमती चावल मंगाते हैं लेकिन मार्च से ही जल मार्ग पर आवाजाही बाधित होने के कारण भारतीय निर्यातकों को अरब देशों में चावल भेजने में काफी कठिनाई हो रही है। 

अब अमरीका और ईरान के बीच दोबारा शांति वार्ता आरंभ करवाने की कोशिश हो रही है। अगर इसका सार्थक परिणाम सामने आया तो भारत से चावल सहित अन्य महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों का निर्यात सामान्य ढंग से होने की संभावना बढ़ जाएगी।