चीनी का घरेलू बाजार भाव तेज होने से निर्यातक असमंजस में
24-Jan-2025 03:37 PM
मुम्बई । केन्द्र सरकार द्वारा 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दिए जाने के बाद इस मीठी वस्तु के एक्स फैक्टरी मूल्य में 300-350 रुपए प्रति क्विंटल की भारी बढ़ोत्तरी हो गई जिससे निर्यातक चिंतित हो रहे हैं।
दुविधा या असमंजस का एक कारण यह भी है कि मिलर्स निर्यातकों को एक्स फैक्टरी मूल्य से 200-300 रुपए प्रति क्विंटल ऊंचे दाम पर चीनी बेचना चाहते हैं जबकि वैश्विक बाजार भाव इसके लिए अनुकूल नहीं है। भारत से चीनी के निर्यात की संभावना से वैश्विक बाजार भाव नीचे आने लगा है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार कुछ ही दिनों के अंदर चीनी का एक्स फैक्टरी मूल्य 3300-3400 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 3600-3700 रुपए प्रति क्विंटल हो गया जबकि निर्यातकों की सक्रियता बढ़ने पर आगे इसमें कुछ और तेजी आ सकती हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय मुद्रा की दृष्टि से चीनी का दाम नीचे हो गया है।
यदि वर्तमान मूल्य पर निर्यातक मिलर्स से चीनी की खरीद करके उसका शिपमेंट करना चाहे तो उसका खर्च 3800-4000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बैठेगा।
निर्यातकों को कुछ लाभांश (मार्जिन) मिलना भी आवश्यक है। इसका मतलब यह हुआ कि चीनी का वैश्विक बाजार भाव 4000-4200 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास या इसके ऊपर होना चाहिए।
मिलर्स नीचे दाम पर निर्यातकों को अपनी चीनी नहीं बेचना चाहते हैं जबकि निर्यातकों का ध्यान वैश्विक बाजार मूल्य पर केन्द्रित है।
भारत से चीनी का निर्यात अगले आठ महीनों यानी 30 सितम्बर 2025 तक जारी रह सकता है इसलिए मिलर्स तथा निर्यातक- दोनों ही सही समय का इंतजार कर सकते हैं।
जब भी वैश्विक बाजार मूल्य में तेजी का माहौल बनेगा तब भारतीय निर्यातक सक्रिय हो सकते हैं। ब्राजील में चीनी उत्पादन का सीजन औपचारिक तौर पर समाप्त हो चुका है जबकि अगला सीजन अप्रैल में आरंभ होगा।
इस बीच चीनी का अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव ऊंचा तथा मजबूत रह सकता है। रमजान की मांग निकलने वाली है और तब तक निर्यातक अपनी रणनीति बनाने में सफल हो सकते हैं।
