बांधों-जलाशयों में मात्र 33 प्रतिशत पानी का स्टॉक मौजूद

22-May-2026 10:37 AM

नई दिल्ली। देश के अधिकांश इलाकों में वर्षा का अभाव रहने तथा भीषण गर्मी की वजह से वाष्पीकरण की गति तेज होने के कारण बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर घटकर चिंताजनक स्तर तक नीचे आ गया है जबकि छोटे-छोटे जल स्रोत या तो सूख गए हैं या सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। देश के बीच में से दो जलाशय में पानी का स्तर गिरकर 40 प्रतिशत से नीचे आ गया है। 

केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि देश के 166 प्रमुख बांधों- जलाशयों में पानी का स्तर घटकर कुल भंडारण क्षमता 183.565 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) के सापेक्ष महज 33 प्रतिशत रह गया है

जबकि दक्षिण भारत में तो यह और भी घटकर महज 25 प्रतिशत रह गया है। वैसे मौजूदा जल स्तर गत वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत बिंदु और दस वर्षीय औसत के मुकाबले 24 प्रतिशत बिंदु ऊंचा है। 

ध्यान देने की बात है कि अल नीनो के संभावित प्रकोप को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (जून-सितम्बर 2026) के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत से कम वर्षा होने का अनुमान लगाया है। 

देश के सभी पांच संभागों में बांधों का जल स्तर तेजी से घटता जा रहा है जो गंभीर चिंता का विषय है। अगले महीने से खरीफ फसलों की बिजाई शुरू होने वाली है और भयंकर गर्मी पड़ने से खेतों की मिटटी में नमी का भारी अभाव देखा जा रहा है।