बेहतर घरेलू उत्पादन के आसार से चना के मूल्य पर दबाव

30-Jan-2025 05:36 PM

नई दिल्ली । पिछले साल की तुलना में चालू रबी सीजन के दौरान चना का उत्पादन क्षेत्र 95.87 लाख हेक्टेयर से 2.8 प्रतिशत बढ़कर 98.55 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया और अधिकांश इलाकों में मौसम की हालत फसल के लिए अनुकूल होने से इसका घरेलू उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है।

कुछ क्षेत्रों में अगैती बिजाई फसल की छिटपुट कटाई-तैयारी भी आरंभ हो गई है। उधर विदेशों और खासकर ऑस्ट्रेलिया तथा तंजानिया से भारी मात्रा में चना का शुल्क मुक्त आयात भी हो रहा है। 

महाराष्ट्र कर कर्नाटक की कुछ मंडियों में नया चना आने लगा है। अक्सर वहां अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा गुजरात आदि की तुलना में नए चने की आवक पहले शुरू हो जाती है।

2024-25 सीजन के लिए चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाकर 5650 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जो 2023-24 सीजन के लिए नियत समर्थन मूल्य 5440 रुपए प्रति क्विंटल से 210 रुपए ज्यादा है। 

अगस्त 2024 में चना का भाव एक समय उछलकर 8000 रुपए प्रति क्विंटल के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था लेकिन बाद में नरम पड़ने लगा।

अब इसका दाम एमएसपी के निकट आ गया है जबकि जोरदार आपूर्ति के समय एमएसपी से नीचे आने की संभावना है। देसी चना के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 मार्च 2025 तक निर्धारित है।

जानकारों का कहना है कि घरेलू प्रभाग से आपूर्ति एवं उपलब्धता की सुगम स्थिति को देखते हुए सरकार भारतीय किसानों के हित में चना के शुल्क मुक्त आयात की अवधि 31 मार्च से आगे नहीं बढ़ाना चाहेगी।

यदि इसके बावजूद बाजार भाव घटता है तो सरकार  को किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बफर स्टॉक के लिए भारी मात्रा में चना खरीदने का अवसर मिल सकता है। पीली मटर का विशाल आयात पहले ही हो चुका है और इसका भारी-भरकम स्टॉक अभी मौजूद है। 

चालू रबी सीजन में मटर का घरेलू उत्पादन क्षेत्र करीब 8.95 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया जो पिछले साल के लगभग बराबर ही है।

दलहन वाली मटर के नए माल की आवक फरवरी में शुरू होने तथा मार्च में जोर पकड़ने की संभावना है। इससे इसकी आपूर्ति बढ़ जाएगी और चना की मांग एवं कीमत प्रभावित है सकती है।