भारतीय चीनी मिलों को निर्यात सौदों में मिल रही है अच्छी सफलता

23-Mar-2026 08:11 PM

मुम्बई। डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आने तथा वैश्विक बाजार भाव तेज होने से भारतीय मिलर्स को अपनी चीनी का निर्यात अनुबंध करने में अच्छी सफलता प्राप्त हो रही है।

भारतीय चीनी का निर्यात ऑफर मूल्य विदेशी खरीदारों के लिए काफी आकर्षक हो गया है। पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट से ब्राजील में एथनॉल का उत्पादन बढ़ाने पर चीनी उद्योग द्वारा अधिक जोर दिए जाने की संभावना है। चीनी के वैश्विक बाजार मूल्य पर इसका सकारात्मक मनोवैज्ञानिक असर पड़ रहा है। 

उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार पिछले सप्ताह भारत के मिलर्स द्वारा करीब एक लाख टन चीनी का निर्यात अनुबंध किया गया और इसकी प्रक्रिया अभी जारी है। उल्लेखनीय है कि ब्राजील के बाद भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक देश है

और यहां भाव आकर्षक तथा प्रतिस्पर्धी होने से एशिया तथा अफ्रीका के देशों को कम दाम पर चीनी खरीदकर इसका स्टॉक बनाने का मौका मिल सकता है। शिपमेंट चार्ज तथा चीनी का वैश्विक बाजार मूल्य बढ़ता जा रहा है। चीनी का वायदा मूल्य न्यूयार्क एवं लन्दन एक्सचेंज में बढ़कर पिछले पांच माह के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

एक विश्लेषक के अनुसार ईरान-अमरीका युद्ध ने अचानक सभी चीजों को बदल दिया है। एक तरफ चीनी का वैश्विक बाजार भाव ऊंचा हो गया है तो दूसरी ओर भारतीय रुपए का भारी अवमूल्यन हो रहा है।

भारतीय चीनी का फ्री ऑन बोर्ड निर्यात ऑफर मूल्य फिलहाल करीब 450 डॉलर प्रति टन चल रहा है। श्रीलंका, जिबूती, तंजानिया तथा सोमालिया जैसे देश अप्रैल-मई शिपमेंट के लिए चीनी खरीद रहे हैं। भारतीय मिलों द्वारा अब तक 5.50 लाख टन चीनी का सौदा किया जा चुका है।