अल नीनो से मानसून को हो सकता है खतरा
18-Mar-2026 04:03 PM
नई दिल्ली। चालू वर्ष के दौरान अल नीनो मौसम चक्र की सक्रियता उस समय बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने पीक पर होता है।
मानसून का आगमन जून में होता है और जुलाई-अगस्त में पीक पर रहने के बाद सितम्बर से इसकी तीव्रता घटने लगती है और यह वापस लौटने लगता है।
इस वर्ष जुलाई से सितम्बर के दौरान अल नीनो के आने की 97 प्रतिशत संभावना व्यक्त की गई है जबकि इसी अवधि में देश के अंदर सबसे ज्यादा बारिश होती है। खरीफ फसलों की खेती का भी यही समय होता है।
अल नीनो के आने से अक्सर मानसून कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम होने से देश के विभिन्न भागों में सूखे का खतरा बढ़ जाता है।
इसका मतलब यह हुआ कि जब देश में खरीफ फसलों की जोरदार बिजाई का समय रहेगा तब मानसून की वर्षा में रूकावट पैदा हो सकती है।
इससे धान, दलहन, तिलहन, कपास और मोटे अनाजों की खेत पर असर पड़ सकता है। बिजाई क्षेत्र में कमी आने तथा सही समय पर अच्छी वर्षा नहीं होने पर उत्पादन घट सकता है।
