दलहनों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की जरूरत पर जोर

09-Feb-2026 04:03 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा है कि दलहनों का आयात देश के लिए गर्व की नहीं बल्कि शर्म की बात है और भारत का इरादा दुनिया में दलहनों का सबसे प्रमुख आयातक नहीं बल्कि सबसे बड़ा निर्यातक देश बनने का होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि भारत पिछले अनेक वर्षों से संसार में दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादन, उपभोक्ता एवं आयातक देश बना हुआ हैं जबकि थोड़ी-बहुत मात्रा में यहां से दाल-दलहन का निर्यात भी होता है। 

कृषि मंत्री के अनुसार भारत का पहला लक्ष्य दलहनों के उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनने का होना चाहिए। इससे विदेशी मुद्रा की बचत करने में सहायता मिलेगी।

उसके बाद उत्पादन में वृद्धि की निरंतरता बरकरार रहने पर देश में दलहनों का अधिशेष स्टॉक मौजूद रह सकता है जिससे निर्यात की संभावना बढ़ जाएगी।  

मंत्री महोदय के मुताबिक इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन का निर्माण किया गया है। सरकार विदेशों से दलहनों के आयात को खत्म करना चाहती है।

घरेलू प्रभाग में उत्पादन बढ़ने पर किसानों की आमदनी में इजाफा होगा। इस मिशन के अंतर्गत सभी राज्य अपने-अपने क्षेत्रों में रोडमैप तैयार करेंगे ताकि स्थानीय स्तर की जरूरतों के आधार पर मिशन की गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सके। 

कृषि मंत्री के अनुसार दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन को विज्ञान, नीति, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), बीज सुधार एवं बाजार समर्थन आदि के माध्यम से वास्तविक धरातल पर क्रियान्वित किया जाएगा ताकि बेहतर परिणाम सामने आ सके। इनका कहना था की नया बीज अब व्यावसायिक खेती के उदेश्य से दिल्ली में जारी नहीं किया जाएगा

बल्कि राज्यों में किसानों के बीच इसे जारी किया जाएगा क्लस्टर मॉडल के अंतर्गत किसानों को मॉडल फार्मिंग (खेती) के लिए बीज का कीट (छोटी थैली) तथा हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से सहयोग राशि उपलब्ध करवाई जाएगी।