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दाल मिलों की कमजोर लिवाली से अरहर में गिरावट, देसी तुवर ₹200–300 और आयातित तुवर ₹100–150 प्रति क्विंटल टूटी

13-Oct-2026 06:35 PM

दाल मिलों की कमजोर लिवाली से अरहर में गिरावट, देसी तुवर ₹200–300 और आयातित तुवर ₹100–150 प्रति क्विंटल टूटी

घरेलू बाजार में ऊंचे भावों पर दाल मिलों की मांग सीमित रहने और लिवाली शांत पड़ने से आज अरहर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। देसी तुवर के भाव में 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तथा आयातित तुवर की कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई। हाल के दिनों में कीमतों में एकतरफा तेजी आने के बाद ऊंचे भावों पर दाल मिलर्स खरीदारी में सतर्कता बरत रहे हैं, जिससे बाजार की तेजी पर दबाव देखने को मिला।

सरकारी हस्तक्षेप की आशंका से खरीदारी में सतर्कता

अरहर की कीमतों में हालिया तेजी के बाद बाजार में केंद्र सरकार द्वारा कीमतों पर नियंत्रण के लिए स्टॉक लिमिट लागू करने अथवा अन्य कदम उठाए जाने की आशंका बढ़ गई है। इसी कारण व्यापारी और दाल मिलर्स ऊंचे भावों पर नई खरीदारी करने से बच रहे हैं। बाजार में फिलहाल मांग सीमित रहने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए अरहर दाल की खपत और मांग बनी रहने की उम्मीद है। दूसरी ओर, उत्पादक मंडियों में देसी अरहर का बचा हुआ स्टॉक सीमित मात्रा में उपलब्ध है। ऐसे में मांग में सुधार होने पर कीमतों को दोबारा समर्थन मिल सकता है।

कमजोर उत्पादन और महंगे आयात से आपूर्ति की चिंता

चालू खरीफ सीजन में अरहर के उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम की खबरों से फसल उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। यदि उत्पादन अनुमान में कमी आती है, तो आगामी महीनों में घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके अतिरिक्त, अफ्रीकी देशों से अरहर की अपेक्षाकृत सीमित आपूर्ति और कमजोर रुपये के कारण आयात लागत बढ़ने से विदेशी अरहर महंगी पड़ रही है। इससे आयातित माल की खरीद लागत बढ़ी है और घरेलू बाजार में उपलब्धता को लेकर भी चिंता बनी हुई है। हालांकि, आयात की वास्तविक मात्रा और नई फसल के उत्पादन के आंकड़े आगे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेंगे।

आगे कैसी रहेगी अरहर की चाल 

अरहर बाजार में फिलहाल तेजी को समर्थन देने वाले और कीमतों पर दबाव बनाने वाले दोनों कारक सक्रिय हैं। सीमित घरेलू स्टॉक, संभावित उत्पादन में कमी, महंगे आयात और त्योहारी मांग बाजार को सहारा दे सकते हैं। इसके विपरीत, ऊंचे भावों पर दाल मिलों की कमजोर खरीदारी और संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंका कीमतों में तेजी को सीमित कर सकती है। निकट अवधि में अरहर की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से दाल मिलों की खरीदारी, उत्पादक मंडियों में आवक, आयातित माल की उपलब्धता और सरकारी नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी। यदि मांग में सुधार होता है और आपूर्ति सीमित बनी रहती है, तो बाजार को समर्थन मिल सकता है।